संसद के मानसून सत्र का तीसरा सप्ताह शुरू, कई विधेयकों पर नजर

(न्यूज़लाइवनाउ-New Delhi) संसद के मानसून सत्र का तीसरा सप्ताह सोमवार से शुरू हो गया। सरकार ने सदन में अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी की है, वहीं विपक्ष ने भी विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के संकेत दिए हैं। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त तक चलेगा।

सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में दो नए विधेयक पेश किए जाने का प्रावधान रखा गया है। इनमें भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 और बैंकर बही साक्ष्य अधिनियम, 2026 शामिल हैं। इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अतिरिक्त अनुदान की मांगों से संबंधित बयान भी सदन में पेश करेंगी।

इन विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी

सरकार आने वाले दिनों में कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी संसद से मंजूरी दिलाने की कोशिश कर सकती है। इनमें जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी पेश कर सकती है। इससे स्पष्ट है कि सत्र के अगले चरण में सरकार का जोर अपने विधायी कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने पर रहेगा।

पेपर लीक का मुद्दा गरम

मानसून सत्र के दौरान परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा है। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने सदन में चर्चा तथा सरकार से जवाब की मांग की है। इन्हीं मुद्दों के कारण इससे पहले संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई थी।

सरकार की ओर से पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है। इस प्रस्तावित कानून में परीक्षा में अनुचित साधनों और पेपर लीक जैसी गतिविधियों पर कठोर दंड का प्रावधान करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर दलबदल विरोधी कानून पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने आग्रह किया कि प्रश्नकाल, शून्यकाल और सूचीबद्ध कार्यवाही को रोककर इस विषय पर सदन में विस्तार से विचार किया जाए।

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने छात्रों से जुड़े विवाद को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर प्रधानमंत्री की ओर से माफी की बात कही गई थी, लेकिन उनके अनुसार माफी सरकार के शीर्ष नेतृत्व को मांगनी चाहिए।

आगे भी हंगामे के आसार

संसद के तीसरे सप्ताह में सरकार जहां लंबित विधायी कार्यों को पूरा कराने पर जोर दे सकती है, वहीं विपक्ष परीक्षा व्यवस्था, छात्रों के प्रदर्शन, दलबदल कानून और अन्य राजनीतिक मुद्दों को सदन में उठाने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के साथ-साथ सदन की कार्यवाही में व्यवधान की स्थिति भी बन सकती है।

फिलहाल सोमवार की कार्यसूची से संकेत मिलता है कि सरकार नए विधेयकों को सदन के पटल पर लाने के साथ-साथ पहले से लंबित विधायी प्रस्तावों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।

और खबरों के लिए हमें फॉलो करें Facebook पर।

BillparliamentParliament Session