(न्यूज़लाइवनाउ-Nepal) दुनिया की सबसे ऊंची और चुनौतीपूर्ण चोटियों पर अपनी असाधारण उपलब्धियों से पहचान बनाने वाले नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल ‘निम्स’ पुर्जा अब हमारे बीच नहीं रहे। पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। इस हादसे में उनके साथ मौजूद नौ अन्य पर्वतारोहियों की भी जान चली गई। पुर्जा की मौत की पुष्टि उनकी पर्वतारोहण कंपनी की ओर से की गई है।
8,051 मीटर ऊंची चोटी पर टूटा बर्फ का कहर
यह हादसा गुरुवार को ब्रॉड पीक पर उस समय हुआ, जब पर्वतारोहियों का दल चढ़ाई के अभियान में जुटा था। करीब 8,051 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। अचानक आए विशाल हिमस्खलन ने पर्वतारोहियों को अपनी चपेट में ले लिया।
हादसे के बाद कई पर्वतारोही लापता हो गए थे। बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के बीच बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती बना रहा। बाद में ड्रोन की मदद से शवों का पता लगाया गया।
निर्मल पुर्जा को पर्वतारोहण की दुनिया में उनकी असाधारण गति और साहस के लिए जाना जाता था। वर्ष 2019 में उन्होंने महज छह महीने और छह दिन में दुनिया की सभी 14, आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों पर चढ़ाई पूरी कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। यह उपलब्धि उस समय पर्वतारोहण की दुनिया में एक ऐतिहासिक कारनामा मानी गई।
उन्होंने एवरेस्ट, K2, कंचनजंगा, अन्नपूर्णा, ल्होत्से, मकालू और नंगा पर्वत समेत दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
’14 Peaks’ डॉक्यूमेंट्री से दुनियाभर में मिली पहचान
पुर्जा के इस असाधारण अभियान को नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री ‘14 Peaks: Nothing Is Impossible’ में भी दिखाया गया। इसके बाद उनकी कहानी दुनिया के करोड़ों दर्शकों तक पहुंची और वह पर्वतारोहण की दुनिया के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए।
उनकी उपलब्धियों ने खास तौर पर नेपाल के युवा पर्वतारोहियों को प्रेरित किया। ऊंचाई वाले अभियानों में उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता की भी व्यापक रूप से सराहना की जाती रही।
निर्मल पुर्जा का जीवन केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं था। वह ब्रिटिश सेना की विशेष इकाई रॉयल मरीन में भी सेवा दे चुके थे। सैन्य प्रशिक्षण और कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव उनके पर्वतारोहण अभियानों में भी दिखाई देता था।
बचाव अभियान में आईं कई मुश्किलें
हिमस्खलन के बाद लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए बचाव अभियान चलाया गया। हालांकि ब्रॉड पीक की ऊंचाई, बर्फीला भूभाग और अत्यंत कठिन मौसम ने अभियान को बेहद जोखिमपूर्ण बना दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, ड्रोन के जरिए कुछ शवों का पता लगाने में सफलता मिली, लेकिन उन्हें नीचे लाना आसान नहीं है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से लंबी रस्सी के जरिए शव निकालने जैसी अत्याधुनिक बचाव तकनीकों की सीमित उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है।
निर्मल पुर्जा के निधन की खबर सामने आने के बाद दुनिया भर के पर्वतारोहियों और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। नेपाल के प्रधानमंत्री समेत कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।
निम्स पुर्जा का सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा बना रहेगा, जिन्होंने असंभव दिखने वाली ऊंचाइयों को चुनौती देने का सपना देखा है। दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर अपने रिकॉर्ड और साहस की अमिट छाप छोड़ने वाले इस पर्वतारोही का अंत भी उसी ऊंचाई पर हुआ, जिसने उनके जीवन को पहचान दी।
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