(न्यूज़लाइवनाउ-USA) ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम के बाद ट्रंप प्रशासन सैन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस की ओर से संकेत मिले हैं कि यदि तेहरान ने अमेरिकी हितों या सैनिकों को निशाना बनाया तो वाशिंगटन की ओर से कड़ा जवाब दिया जा सकता है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की बात कही गई है। हालांकि, वाशिंगटन की शर्तें पहले की तुलना में अधिक कठोर नजर आ रही हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे न बढ़े और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य एवं वाणिज्यिक हितों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
व्हाइट हाउस पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि ट्रंप प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। जून में दोनों देशों के बीच एक समझौते का भी व्हाइट हाउस ने उल्लेख किया था, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना बताया गया था।
ईरान पर भरोसा कम होने का संकेत
हालिया घटनाओं ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान से जुड़े हमलों और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने बातचीत की प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है। ट्रंप ने भी ईरान के साथ वार्ता की दिशा में निराशा जाहिर की है और संकेत दिया है कि केवल कूटनीतिक दबाव पर्याप्त नहीं हो सकता।
इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन एक तरफ बातचीत का विकल्प खुला रखते हुए दूसरी ओर संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारियों का आकलन कर रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा है। संभावित अभियान में ईरान के सैन्य ढांचे और मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाने से लेकर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तक के विकल्प शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी बड़े सैन्य अभियान में अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय देशों पर प्रभाव और सैन्य संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दे अहम रहेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा
अमेरिका-ईरान विवाद में होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इस मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे।
ईरान से जुड़े हमलों और समुद्री गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी दबाव पड़ रहा है। तेल की आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर किसी भी बड़े व्यवधान का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय गतिविधियों को अमेरिकी सुरक्षा के लिए चुनौती बताता रहा है। व्हाइट हाउस के अनुसार, उसका लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और अमेरिकी नागरिकों तथा सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी नीति के तहत अमेरिका ने पहले आर्थिक दबाव, प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई जैसे कई विकल्पों का इस्तेमाल किया है। अब बातचीत और दबाव के साथ सैन्य विकल्प को भी मेज पर रखा गया है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक ओर बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें जारी रहने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर किसी नए हमले की स्थिति में सैन्य टकराव बढ़ सकता है।
अगर दोनों पक्ष वार्ता की मेज पर लौटते हैं तो परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। लेकिन यदि सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो पूरा पश्चिम एशिया एक बड़े क्षेत्रीय संकट की ओर बढ़ सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन का अगला कदम यह तय करेगा कि अमेरिका-ईरान विवाद कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या फिर संघर्ष का नया दौर शुरू होता है।
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