(न्यूज़लाइवनाउ-New Delhi) दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास स्थित एक करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस भवन का इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी और हॉस्टल के रूप में किया जा रहा था। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं।
अचानक मलबे में तब्दील हुई पूरी इमारत
हादसा रविवार दोपहर करीब 1:33 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ ही पलों में पूरी इमारत धराशायी हो गई और चारों ओर धूल का घना गुबार छा गया। सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भी इमारत के अचानक गिरने का दृश्य दिखाई दे रहा है। रविवार होने की वजह से बड़ी संख्या में छात्र अपने कमरों में मौजूद थे, जिससे हादसे की गंभीरता और बढ़ गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग सबसे पहले मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने का प्रयास शुरू किया। इसके बाद दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें भारी मशीनरी और खोजी कुत्तों के साथ बचाव अभियान में जुट गईं।
12 लोगों को मलबे से निकाला गया
एनडीआरएफ के मुताबिक अब तक कुल 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। इनमें कई घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे के भीतर किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को देखते हुए तलाशी अभियान पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है।
एनडीआरएफ और दमकलकर्मी बेहद सावधानी से मलबा हटा रहे हैं, क्योंकि हादसे वाली इमारत के आसपास भी पुरानी और कमजोर संरचनाएं मौजूद हैं।
बेसमेंट में चल रहा था काम
प्रारंभिक जानकारी में इमारत के बेसमेंट में निर्माण या खुदाई से जुड़े काम का उल्लेख सामने आया है। दिल्ली के मेयर ने बताया कि बेसमेंट में काम चल रहा था और वहां पानी जमा होने की स्थिति भी बनी थी। अधिकारियों को आशंका है कि बेसमेंट में किए जा रहे काम और जलभराव ने इमारत की संरचना को कमजोर किया हो सकता है। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश
हादसे को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में ऐसी इमारतों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा और खतरनाक संरचनाओं को खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी।
आसपास की इमारतों पर भी नजर
हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास मौजूद कुछ इमारतों को भी खाली कराया है। अधिकारियों के मुताबिक मलबा हटाने के दौरान बगल की पुरानी इमारत को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। एक नजदीकी जर्जर इमारत को भी गिराने का आदेश दिया गया है।
बिल्डिंग मालिक की तलाश में 10 टीमें गठित
दिल्ली पुलिस ने भवन के कथित मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार हादसे के बाद से वह फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 10 अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जिनमें स्थानीय पुलिस, स्पेशल स्टाफ और अन्य ऑपरेशनल यूनिट शामिल हैं। पुलिस दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।
पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत में निर्माण कार्य किस तरह कराया जा रहा था, बेसमेंट में काम की अनुमति थी या नहीं और भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच पहले हुई थी या नहीं।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। अदालत ने मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में राजधानी की पुरानी और असुरक्षित इमारतों की स्थिति तथा सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
यह हादसा एक बार फिर दिल्ली में पुराने भवनों, अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में किसी और व्यक्ति के फंसे होने की संभावना खत्म करना और घायलों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है।