(न्यूज़लाइवनाउ-India) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने जहां कामकाज और रचनात्मकता को नई दिशा दी है, वहीं इसका दुरुपयोग साइबर अपराधियों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। डीपफेक तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की असली तस्वीर को इस तरह बदला जा सकता है कि वह किसी ऐसे दृश्य में दिखाई दे, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध न हो। खास तौर पर महिलाओं की तस्वीरों से उनकी सहमति के बिना नकली अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार करने वाले ऐप्स डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।
Clothoff, Nudify और इसी तरह के दूसरे प्लेटफॉर्म इस समस्या को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय जांच के दायरे में रहे हैं। इन सेवाओं के जरिए सामान्य तस्वीरों को आपत्तिजनक रूप में बदलने और ऐसी सामग्री से कमाई करने के आरोपों ने निजता, सहमति और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े किए हैं।
कैसे काम करता है डीपफेक का यह खेल?
डीपफेक में AI एल्गोरिदम किसी व्यक्ति के चेहरे, हाव-भाव और तस्वीरों का इस्तेमाल करके ऐसी सामग्री तैयार कर सकते हैं, जो देखने में वास्तविक लगे। Nudify जैसे ऐप्स पर आरोप रहा है कि वे लोगों की सामान्य तस्वीरों को बिना अनुमति यौन रूप से आपत्तिजनक छवियों में बदलने की सुविधा देते हैं। इसका शिकार आम महिलाएं, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हस्तियां भी हो सकती हैं।
इस तरह तैयार की गई तस्वीरें पीड़ित की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने या ब्लैकमेल करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि तस्वीर नकली होने के बावजूद उसे देखकर लोग उसे सच मान सकते हैं।
Clothoff और Nudify जैसे प्लेटफॉर्म पर क्यों उठे सवाल?
अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकारिता संस्था Bellingcat की पड़ताल में Clothoff, Nudify, Undress और DrawNudes जैसे प्लेटफॉर्मों के बीच आपसी संबंधों के संकेत मिले थे। जांच में वेबसाइटों के डिजाइन, उनसे जुड़े डोमेन, कंपनियों और भुगतान व्यवस्था में समानताएं सामने आई थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सेवाओं ने भुगतान हासिल करने के लिए अलग-अलग ऑनलाइन माध्यमों और दूसरी वेबसाइटों का सहारा लिया। इससे ऐसे प्लेटफॉर्मों के वास्तविक संचालकों की पहचान करना और उनकी गतिविधियों पर रोक लगाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, किसी वेबसाइट या कंपनी के बीच संबंध मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उससे जुड़ा हर व्यक्ति किसी अपराध में दोषी है।
चीन और हांगकांग से जुड़े नेटवर्क पर भी नजर
AI आधारित आपत्तिजनक तस्वीरें बनाने वाले ऐप्स को लेकर चीन और हांगकांग से जुड़ी कंपनियों की भूमिका पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और सवाल उठते रहे हैं। जून 2025 में Meta ने हांगकांग की कंपनी Joy Timeline HK Limited के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की थी। कंपनी पर CrushAI नाम से ऐसे ऐप संचालित करने का आरोप था, जिनसे लोगों की सहमति के बिना नकली नग्न तस्वीरें तैयार की जा सकती थीं।
Meta के मुताबिक, इन ऐप्स के विज्ञापनों को अपने प्लेटफॉर्म पर रोकने और ऐसे कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कदम उठाए गए। यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने वाली कंपनियों और AI ऐप संचालकों की जवाबदेही तय करना कितना जरूरी हो गया है।
पीड़ितों की निजता और सुरक्षा पर बड़ा खतरा
डीपफेक का दुरुपयोग केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की गरिमा, निजता और सहमति के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। किसी की तस्वीर को बिना अनुमति आपत्तिजनक रूप में बदलना और उसे इंटरनेट पर फैलाना पीड़ित के लिए लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों, ऐप स्टोर, भुगतान सेवाओं और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। साथ ही, AI से बनाई गई भ्रामक सामग्री की पहचान करने और शिकायत मिलने पर उसे तेजी से हटाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
ऐसे साइबर अपराध से कैसे बचें?
- अपनी निजी तस्वीरें और संवेदनशील जानकारी अनजान वेबसाइटों या ऐप्स पर साझा करने से बचें।
- सोशल मीडिया अकाउंट की गोपनीयता सेटिंग्स की समीक्षा करें।
- यदि आपकी तस्वीर से फर्जी आपत्तिजनक सामग्री बनाई गई है, तो उसके लिंक और स्क्रीनशॉट जैसे सबूत सुरक्षित रखें।
- संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करें और जरूरत पड़ने पर साइबर पुलिस से संपर्क करें।
- ऐसी सामग्री को आगे साझा न करें, क्योंकि इससे पीड़ित को और नुकसान पहुंच सकता है।