(न्यूज़लाइवनाउ-India) कक्षा 9 में तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किए जाने संबंधी CBSE की नई व्यवस्था अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आ गई है।
इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सभी पक्षों से 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी जानना चाहा कि नई व्यवस्था को लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी हैं या नहीं। अदालत ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि क्या सभी स्कूलों में पर्याप्त भाषा शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं।
याचिकाओं में क्या उठाए गए सवाल?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने शैक्षणिक सत्र के बीच नई भाषा नीति लागू कर दी, जिससे लाखों विद्यार्थियों और स्कूलों के सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। उनका तर्क है कि कई विद्यालयों में न तो आवश्यक भाषा शिक्षक हैं और न ही संबंधित विषयों की किताबें उपलब्ध हैं। ऐसे में छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव पड़ेगा।
CBSE के नए नियमों के अनुसार, वर्ष 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। यदि कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या अन्य विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुना जा सकेगा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस नीति के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वह याचिकाओं में उठाए गए सभी कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जिसमें केंद्र, CBSE और NCERT के जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।