केरेल में बाढ़ से हुई तबाही का नहीं लगाया जा सकता है कोई अंदाज

हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने समीक्षा बैठक कर केंद्र से राज्‍य को दोबारा पटरी पर लाने के लिए 2600 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की है

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : केरल में बाढ़ से हुई व्यापक तबाही की तस्वीर सामने आने के बाद से हर कोई हैरान है। केरल के चौदह में से तेरह जिले जलमग्‍न होने के बाद यहां पर जो नुकसान का जायजा लिया गया है उसके मुताबिक यहां 20 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। आपको बता दें कि केरल के नौ जिले समुद्री तट से मिलते हैं। इस बाढ़ में सबसे ज्‍यादा तबाही इडुकी जिले में हुई है। यहां पर भूस्‍खलन यहां पर खेत खलिहान से लेकर घर तक पानी में डूब चुके हैं। इसके अलावा मल्‍लापुरम, कोट्टयम और एरनाकुलम में भी काफी तबाही हुई है। हालांकि अब समय के साथ स्थिति में कुछ सुधार होना शुरू हो गया है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि केरल में करीब 75 ताल्‍लुका, 152 कम्‍यूनिटी डेवलेपमेंट ब्‍लॉक और 941 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से कई बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर हैं। केंद्र ने इसको गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित किया है।
हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने समीक्षा बैठक कर केंद्र से राज्‍य को दोबारा पटरी पर लाने के लिए 2600 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की है। हालांकि केंद्र ने कल ही केरल के लिए 600 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसको मिलाकर अब तक केंद्र की तरफ से 680 करोड़ रुपये की अंतरिम सहायता की घोषणा की जा चुकी है। वहीं दूसरी तरफ यूएई द्वारा केरल को मदद के नाम पर दिए जाने वाले 700 करोड़ रुपये (दस करोड़ डॉलर) को फिलहाल भारत ने ठुकरा दिया है। राज्‍य सरकार ने फैसला किया है कि वह केंद्र से ऋण की सीमा बढ़ाने के लिए कहेगा ताकी वह राज्‍य के पुनर्निर्माण कार्यों के लिए खुले बाजार से कर्ज हासिल कर सके। वर्तमान व्यवस्था में केरल अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद का तीन फीसद कर्ज के रूप में ले सकता है।
केरली की बाढ़ का अंदाज इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यहां पर 1223 लोगों की जान अब तक जा चुकी है। पिछले एक पखवाड़े में ही करीब 223 लोगों की जान गई है। इसके अलावा बाढ़ से 10 लाख लोग बेघर हुए हैं। करीब 2.12 लाख महिलाओं, एक लाख बच्चों समेत 10.78 लाख लोगों ने 3,200 राहत शिविरों में शरण ले रखी है। इस बाढ़ से करीब दस हजार किमी की सड़कें बर्बाद हो गई हैं ओर एक लाख घर तबाह हुए हैं।  
केरल में बाढ़ पीडि़तों को राहत दिलाने में बड़े पैमान पर सेना और अर्द्धसैनिक बल लगे हुए हैं। इसमें एनडीआरएफ की 58 बटालियन भी शामिल हैं। एनडीआरएफ अब तक करीब 26 हजार लोगों को बचाकर सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचा चुका है। इतना ही नहीं एनडीआरएफ की बचाव टीमें लोगों को खाना, मेडिकल सुविधा भी मुहैया करवा रही हैं। इसके अलावा एयरफोर्स के 22 हेलिकॉप्टर, नेवी की 40 नाव, कोस्ट गार्ड की 35 नाव, बीएसएफ की 4 कंपनियों के अलावा केरल पुलिस, स्थानीय युवा और मछुआरे तक लोगों को बचाने में जुटे हैं। 
केंद्र की तरफ से बाढ़ पीड़ितों के बीच मुफ्त वितरण के लिए 89,540 टन खाद्यान्न व 100 टन दालें भेजे जाने की भी घोषणा केंद्रीय मंत्री द्वारा की जा चुकी है। इसके अलावा राजस्थान सरकार ने केरल में पीडि़तों के लिए तीन ट्रक दवाइयां रवाना की हैं। इसके अलावा राज्‍य के विधायकों और अधिकारियों का एक दिन का वेतन भी राहत कोष में दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे केरल की भौगोलिक स्थिति के अलावा वहां के बांधों का खराब प्रबंधन भी बड़ी वजह है।
केरल में जमीन के स्तर से निचले इलाकों की संख्या बहुत अधिक है। यहां का 10 फीसद भौगोलिक क्षेत्र समुद्र स्तर से भी नीचे है। इस क्षेत्र में लोगों ने घर और व्यापार स्थापित कर लिए हैं, जबकि यह क्षेत्र रहने के लिए सही नहीं हैं।इस वर्ष जून में नीति आयोग ने जल संसाधन को लेकर राज्यों की रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें दक्षिण के राज्यों में केरल का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। जल की आपूर्ति करने वाली यहां की छोटी नहरों का ठीक से प्रबंधन नहीं किया गया था।
आबादी घनत्व के मामले में केरल देश के शीर्ष राज्यों में गिना जाता है। यहां प्रति वर्ग किमी में 860 लोग रहते हैं जो कि देश के औसत आबादी घनत्व के दोगुने से भी ज्यादा है। इसका मतलब यह हुआ कि बाढ़ की स्थिति में अधिक लोग अपने घरों से बेघर हुए।पर्यावरणविदों के मुताबिक इस क्षेत्र में अत्यधिक खनन और खोदाई, गैर-वनीय कामों के लिए भूमि का इस्तेमाल और नदियों के कैचमेंट एरिया में ऊंची इमारतों के बनाए जाने से केरल में बाढ़ ने त्रासदी का रूप ले लिया। बांधों के दरवाजे समय रहते न खोले जाने के चलते भी समस्या बढ़ती चली गई।

Leave A Reply