लोकसभा ने अशांत कश्मीर के लिए शांति का संकल्प लिया

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नई दिल्ली: लोकसभा ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से जम्मू एवं कश्मीर में बिगड़ती स्थिति पर चिंता जाहिर की और राज्य में शांति तथा लोगों, खास तौर पर युवाओं में विश्वास बहाली का संकल्प लिया. प्रस्ताव पढ़ते हुए अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा, “कश्मीर घाटी में लंबे समय से बनी अशांति, हिंसा और कर्फ्यू पर यह सदन गहरा दुख व्यक्त करता है और बिगड़ती स्थिति के कारण मौतों और लोगों के गंभीर रूप से घायल होने से चिंतित है.”

उन्होंने कहा, “सदन का दृढ़ और सुविचारित दृष्टिकोण है कि एकता, अखंडता और राष्ट्र की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता है.” प्रस्ताव में कहा गया, “यह समान रूप से जरूरी है कि लोगों का कष्ट दूर करने के लिए शांति एवं व्यवस्था बहाल करने हेतु तुरंत कदम उठाए जाएं.” प्रस्ताव में जम्मू एवं कश्मीर में शीघ्र सामान्य स्थिति और सामंजस्य की बहाली के लिए राज्य और भारत के सभी वर्गो के लोगों से काम करने की अपील की गई और आम लोगों तथा खास तौर पर युवाओं में विश्वास बहाल करने का सर्वसम्मति से संकल्प लिया गया.

पहले सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुझाव दिया कि जम्मू एवं कश्मीर में अशांति के मद्देनजर सदन को एक प्रस्ताव लाना चाहिए. कांग्रेस नेता को जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस सप्ताह के शुरू में उच्च सदन ने इस आशय का एक प्रस्ताव पास किया था और इस तरह का एक प्रस्ताव निचले सदन में भी पारित करने के लिए सरकार कहीं ज्यादा इच्छुक है.

सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी भी अन्य वरिष्ठ सदस्यों के बीच उपस्थित थे. कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में आठ जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से कश्मीर घाटी में हिंसा व तनाव व्याप्त है. इस दौरान अब तक 56 लोगों की मौत हो चुकी है.

अलगाववादी नेताओं के बंद के आह्वान के बीच घाटी में कर्फ्यू लगा हुआ है. उपद्रव शुरू होने के बाद से शिक्षण संस्थान, दुकानें, कार्यालयों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं.

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