सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखा बिक्री पर रोक संबंधी आदेश का प्रभाव दिवाली के दौरान देखना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए. के. सीकरी की बेंच ने कहा कि पिछले साल नवंबर में जो लाइसेंस सस्पेंड किए गए थे, उसको एक मौका मिलना चाहिए कि इसका टेस्ट हो जाए कि दिवाली के दौरान इसका क्या सकारात्मक परिणाम दिखता है। पिछले दिवाली में पटाखे का प्रभाव दिखा था। एयर क्वॉलिटी की स्थिति बदतर हो गई थी। स्थिति खतरनाक लेवल तक जा पहुंची थी। शहर का दम घुटने लगा था। स्कूल और दूसरे अथॉरिटी ने हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति में तमाम उपाय किए थे। पिछले साल दिवाली की अगली सुबह ऐसी स्थिति दिखी थी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश उसके बाद जारी हुआ था।
11 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि राजधानी दिल्ली और एनसीआर में पटाखे की बिक्री नहीं होगी और लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन इस आदेश का दिवाली के समय टेस्ट होना बाकी था।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा या कि दिल्ली में एयर क्वॉलिटी बदतर हो चुकी है। जाड़े में हालात काफी खराब हो जाते हैं। त्योहारों और दिवाली के मौके पर स्थिति बेहद खतरनाक लेवल पर पहुंच जाती है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में पल्यूशन लेवल दिल्ली में 29 गुणा ज्यादा बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 12 सितंबर 2017 का जो आदेश है वह क्रमवार तरीके से जारी हुआ है।
आदेश के समय याचिकाकर्ता और कोर्ट को इस बात की जानकारी नहीं थी कि सीपीसीबी ने 20 साल पहले कहा था कि पटाखे में सल्फर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, क्योंकि सल्फर ऑक्सिजन के साथ मिलकर सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है। यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। सीपीसीबी ने कहा था कि दिवाली की रात 9 बजे के बाद सल्फर डाइऑक्साइड का लेवल खतरनाक होता है। साथ ही कहा था कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जाए। 11 नवंबर 2016 का जो आदेश था उसमें दिल्ली में एयर में पीएम लेवल खतरनाक बताया गया था।