इरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य  एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र

(न्यूज़लाइवनाउ-Iran) इरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। इसी बीच ईरान के एक वरिष्ठ नेता के बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण किसी परमाणु बम से कम प्रभावशाली नहीं है, क्योंकि यदि इसे बंद किया गया तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

 होर्मुज को बताया रणनीतिक ‘सुपर हथियार’

ईरानी नेता का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ऐसा रणनीतिक साधन है, जिससे दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया जा सकता है। उनके अनुसार, केवल एक निर्णय से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए उन्होंने इसे परमाणु हथियार जैसी ताकत वाला भू-राजनीतिक साधन बताया।

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है।

 ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है जब उसका परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं और सैन्य गतिविधियां भी तेज हुई हैं। हाल के घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

 विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की रुकावट आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे परिवहन लागत, महंगाई और ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण इस समुद्री मार्ग को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है।

 ईरान के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं। विभिन्न देशों की कोशिश है कि क्षेत्र में तनाव और न बढ़े, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक संकट वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। 

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