सोनम वांगचुक आंदोलन: संसद मार्च से पहले तेज हुआ घटनाक्रम, अस्पताल से रखीं 3 शर्तें

(न्यूज़लाइवनाउ-India) शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में चल रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों तक अनशन करने के बाद उन्हें स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस आश्वासन मिलता है तो वे अपना उपवास समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। 

अस्पताल से जारी संदेश में वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने का है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा प्रणाली में हुई कथित विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे या विभिन्न राजनीतिक दल संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा और कार्रवाई का भरोसा दें, तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी आवाजाही, संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। 

संसद मार्च में शामिल होने की जताई इच्छा

सफदरजंग अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद वांगचुक ने चिकित्सकों से अस्थायी छुट्टी देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है और वे प्रस्तावित “चलो संसद” मार्च में स्वयं शामिल होना चाहते हैं। उनका मानना है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में भाग लेने का अधिकार उन्हें मिलना चाहिए।

 इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोनम वांगचुक के आग्रह पर अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। दिपके ने कहा कि वांगचुक के अनुरोध और आंदोलन की व्यापक रणनीति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। 

दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल पहुंचाया था। हालांकि आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे जबरन हटाए जाने की कार्रवाई बताया। इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध तेज कर दिया और आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। 

युवाओं के बीच बढ़ा प्रभाव

परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन प्राप्त कर रहा है। वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा सुधार से जुड़े अभियानों का नेतृत्व करते रहे हैं। हाल के दिनों में उनका आंदोलन छात्र समुदाय और युवाओं के बीच व्यापक समर्थन जुटाने में सफल रहा है।

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