ईरान पर ट्रंप की सैन्य कार्रवाई को रोकने की कोशिश नाकाम, अमेरिकी सीनेट में प्रस्ताव 49-50 से खारिज

(न्यूज़लाइवनाउ-Washington) ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर घमासान देखने को मिला। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने और ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी करने वाला प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में बहुमत हासिल नहीं कर सका। प्रस्ताव के पक्ष में 49 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 50 ने इसके खिलाफ वोट दिया।

ट्रंप को मिली बड़ी राजनीतिक राहत

सीनेट में प्रस्ताव के विफल होने से राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने के मामले में तत्काल बड़ी राजनीतिक बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करना था, ताकि ईरान के खिलाफ आगे कोई बड़ा सैन्य कदम उठाने से पहले कांग्रेस की भूमिका सुनिश्चित हो सके।

यह मतदान ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष कई महीनों से जारी है और क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन से हटकर दिया साथ

प्रस्ताव को पूरी तरह विपक्षी डेमोक्रेट्स का समर्थन नहीं मिला, बल्कि कुछ रिपब्लिकन सांसद भी ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठाते हुए इसके पक्ष में खड़े हुए। इसके बावजूद विरोध में पड़े 50 वोटों के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

यह परिणाम रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ईरान नीति को लेकर मौजूद मतभेदों की ओर भी इशारा करता है। हालांकि पार्टी का बड़ा हिस्सा अभी भी ट्रंप की सैन्य नीति के समर्थन में दिखाई दे रहा है।

युद्ध पर कांग्रेस की भूमिका को लेकर बहस

इस पूरे विवाद का केंद्र अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच युद्ध संबंधी अधिकारों का सवाल है। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति लेनी चाहिए।

वहीं ट्रंप प्रशासन का पक्ष है कि राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सैन्य कदम उठाने का अधिकार है। इसी अधिकार को लेकर सीनेट में लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है।

ईरान संघर्ष को लेकर बढ़ती चिंता

अमेरिकी सीनेट में यह मतदान ऐसे वक्त हुआ है जब ईरान संघर्ष को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ रही है। हालिया घटनाओं में अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमले और जवाबी सैन्य कार्रवाई शामिल रही हैं। अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने और युद्ध पर बढ़ते खर्च ने भी ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं।

विरोधी सांसदों का कहना है कि सैन्य अभियान जितना लंबा खिंचेगा, अमेरिका पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव उतना ही बढ़ सकता है। दूसरी ओर, ट्रंप समर्थक इसे अमेरिकी सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई बता रहे हैं।

आगे भी जारी रह सकती है राजनीतिक खींचतान

सीनेट में प्रस्ताव के गिरने के बावजूद ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी संसद में बहस खत्म होने के आसार नहीं हैं। प्रतिनिधि सभा में भी ट्रंप की सैन्य शक्तियों को सीमित करने की कोशिशें सामने आ चुकी हैं। हालांकि ऐसे प्रस्तावों का प्रभाव काफी हद तक राजनीतिक और संवैधानिक बहस तक सीमित रहा है।

फिलहाल सीनेट के फैसले ने ट्रंप प्रशासन को राहत जरूर दी है, लेकिन ईरान संघर्ष को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद बरकरार हैं। आने वाले दिनों में सैन्य अभियान, युद्ध का खर्च और राष्ट्रपति के अधिकार को लेकर कांग्रेस में नई राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल सकती है।

और खबरों के लिए हमें फॉलो करें Facebook पर।

Comments are closed.