(न्यूज़लाइवनाउ-MP) श्रावण मास के दूसरे सोमवार को मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर पूरी तरह भोलेनाथ की भक्ति में डूबी नजर आई। सुबह से ही मंदिर परिसर और नर्मदा के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। चारों ओर ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’ और ‘नर्मदे हर’ के जयकारे सुनाई देते रहे।
फूलों से सजा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
दूसरे सावन सोमवार के अवसर पर भगवान ओंकारेश्वर का विशेष पुष्प शृंगार किया गया। मंदिर के गर्भगृह से लेकर परिसर तक सुगंधित फूलों से आकर्षक सजावट की गई। इस भव्य श्रृंगार की तैयारी रातभर चलती रही। महेश्वर और उज्जैन से आए पंडितों के साथ फूल सजाने में माहिर कारीगरों ने कई क्विंटल फूलों से बाबा का मनोहारी श्रृंगार तैयार किया।
सुबह मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को भगवान के अलौकिक स्वरूप के दर्शन हुए। फूलों से सजे बाबा के दर्शन कर भक्त भाव-विभोर नजर आए।
नर्मदा घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब
श्रावण सोमवार के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचे। भक्तों ने ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से पहले मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाई। नर्मदा घाटों से लेकर मंदिर तक धार्मिक जयघोष का सिलसिला चलता रहा।
श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और दर्शन को लेकर विशेष इंतजाम किए। सामान्य, शुल्क और वीआईपी दर्शन के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू की गईं। कांवड़ यात्रियों के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए गए।
बदला दर्शन मार्ग, पुलिस की कड़ी निगरानी
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस बार दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। श्रद्धालुओं को सुखदेव मुनि द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि पहले इस्तेमाल होने वाले चांदी गेट को निकासी के लिए निर्धारित किया गया है। भक्तों को करीब 10 फीट की दूरी से भगवान के दर्शन कराने की व्यवस्था है।
खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक आगम जैन सहित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मंदिर और प्रमुख रास्तों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
पुजारी और स्थानीय लोगों ने जताई आपत्ति
स्थानीय पंडित-पुजारियों और नागरिकों के लिए जलाभिषेक एवं दर्शन का समय सुबह 5 बजे से 9 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके बाद उन्हें भी आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन करना होगा।
इस व्यवस्था को लेकर कुछ पंडित-पुजारियों में नाराजगी है। पंडित पवन शर्मा का कहना है कि मंदिर में पूजा और अभिषेक की परंपरा से कई ब्राह्मण परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है, इसलिए व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
बड़े वाहनों पर रोक से यातायात रहा सुचारू
श्रावण मास की शुरुआत से इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर बड़े वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। सोमवार को इसका असर भी देखने को मिला। भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद बड़े जाम की स्थिति नहीं बनी।
प्रशासन ने अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की है। बड़े वाहनों को नवीन बस स्टैंड तक ही आने की अनुमति है। इसके बाद श्रद्धालुओं को टेंपो के जरिए नर्मदा घाट, कुबेर भंडारी मंदिर और पुराने बस स्टैंड तक पहुंचाया जा रहा है।
दोपहर में निकलेगी ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की पालकी
श्रावण के दूसरे सोमवार पर दोपहर 2 बजे भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर की भव्य पालकी यात्रा निकाली जाएगी। इससे पहले मां नर्मदा के कोठी तीर्थ घाट पर भगवान ओंकारेश्वर के रजत पंचमुखी मुखौटे का 251 लीटर पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा।
आचार्य पंडित राजराजेश्वरी दीक्षित के मार्गदर्शन में विद्वान पंडित और पुरोहित धार्मिक विधि-विधान से यह अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। अभिषेक के बाद दोनों ज्योतिर्लिंगों की सवारी मां नर्मदा में नौका विहार करेगी और फिर पालकी नगर भ्रमण के लिए निकलेगी।
फूलों की वर्षा से होगा बाबा का स्वागत
पालकी यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाले मठों, मंदिरों, आश्रमों और अखाड़ों में भगवान का स्वागत किया जाएगा। कई स्थानों पर गुलाब और अन्य सुगंधित फूलों की वर्षा की जाएगी।
पालकी यात्रा देर रात तक चलने की संभावना है और करीब 10:30 बजे भगवान की सवारी मंदिर लौटेगी। इसके बाद आरती होगी और भगवान को गर्भगृह में विश्राम के लिए विराजमान किया जाएगा।
श्रावण के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर में सुबह से रात तक भक्ति का माहौल बना रहा। भव्य पुष्प श्रृंगार, नर्मदा में नौका विहार, पालकी यात्रा और श्रद्धालुओं के जयघोष ने पूरी तीर्थनगरी को शिवमय कर दिया।
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