संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की मुहिम नाकाम, अमेरिका ने लगाया वीटो

(न्यूज़लाइवनाउ-UN) अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में बड़ा झटका दिया है। पाकिस्तान ने चीन की मदद से बलूच संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पश्चिमी देशों की तिकड़ी ने इस पहल को रोक दिया।

इस्लामाबाद ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मिलिट्री इकाई मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकी घोषित करने की मांग रखी थी। चीन ने भी पाकिस्तान का पक्ष लिया, लेकिन अमेरिका, इंग्लैंड और फ्रांस ने इसे वीटो कर खारिज कर दिया।

अमेरिका का कहना था कि जिस धारा 1267 के तहत पाकिस्तान ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकी घोषित करने की गुहार लगाई, वह लागू नहीं होती। साथ ही, इस बात के प्रमाण भी नहीं मिले कि ये दोनों संगठन अलकायदा या आईएसआईएस से जुड़े हों।

अमेरिका पहले ही कर चुका है आतंकी करार

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही अमेरिका ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया था। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया था कि मजीद ब्रिगेड दरअसल बीएलए का ही दूसरा नाम है। उस वक्त अमेरिका ने कश्मीर के पहलगाम हमले के जिम्मेदार द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को भी लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध संगठन बताया था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा कार्यकाल (2025-26) में पाकिस्तान अस्थायी सदस्य है, जबकि चीन स्थायी सदस्य है। दोनों देशों ने मिलकर बीएलए और मजीद ब्रिगेड पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका-फ्रांस-ब्रिटेन की तिकड़ी ने उनकी योजना ध्वस्त कर दी।

भारत लंबे समय से मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों पर संयुक्त राष्ट्र में कार्रवाई की पैरवी करता आया है, लेकिन चीन बार-बार वीटो का सहारा लेकर प्रस्ताव रोकता रहा है। यही रणनीति पाकिस्तान और चीन ने इस बार अपनाई, मगर उल्टा अमेरिका और उसके सहयोगियों ने उनके मंसूबों पर ताला जड़ दिया।

बलोच संगठन का पलटवार

बीएलए ने इस फैसले के बाद बयान जारी कर कहा कि उनके योद्धा आतंकी नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने वाले सिपाही हैं। संगठन का दावा है कि उनकी गतिविधियाँ विश्व शांति के खिलाफ नहीं, बल्कि पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के प्रतिरोध का हिस्सा हैं।

पिछले मई में बीएलए ने पाकिस्तान की जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरी थीं। इसके अलावा बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर लगातार हमले करके उन्होंने सरकार के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

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