हिमाचल में बारिश का कहर: कालका-शिमला रेललाइन पर भूस्खलन, 400 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया

(न्यूज़लाइवनाउ-Himachal Pradesh) हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने ऐतिहासिक कालका-शिमला रेल मार्ग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोलन जिले में भारी बारिश के बीच पहाड़ी से मिट्टी और मलबा खिसकने के कारण रेलवे ट्रैक का एक हिस्सा हवा में लटक गया। स्थिति को देखते हुए रेलवे ने इस मार्ग पर ट्रेन संचालन रोक दिया और रविवार को 10 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं।

  400 से अधिक यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला

भूस्खलन के बाद रेलवे ने तत्काल राहत एवं निकासी अभियान शुरू किया। 391 यात्रियों और 40 रेलवे कर्मचारियों समेत 400 से अधिक लोगों को प्रभावित क्षेत्र से निकालकर कालका पहुंचाया गया। यात्रियों को पांच बसों और दो टेंपो ट्रैवलर के जरिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। 

रेलवे के मुताबिक, कुछ ट्रेनों को रास्ते में ही समाप्त कर दिया गया, ताकि यात्रियों को क्षतिग्रस्त हिस्से की ओर जाने से रोका जा सके। स्थानीय यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई। करीब 120 यात्रियों के लिए विशेष रूप से ट्रेन की व्यवस्था की गई। 

कोटी-गुम्मन के बीच ट्रैक को नुकसान

यह घटना कोटी और गुम्मन स्टेशनों के बीच ब्रिज नंबर 57 के पास हुई। लगातार बारिश के कारण ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे रेलवे लाइन का एक हिस्सा असुरक्षित हो गया। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शनिवार रात से इस हिस्से में ट्रेन परिचालन रोक दिया। 

10 ट्रेनें रद्द, बहाली के लिए काम शुरू

स्थिति को देखते हुए रविवार को कालका और शिमला के बीच चलने वाली कुल 10 नैरो गेज ट्रेनें रद्द की गईं। रेलवे का कहना है कि ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित करने और नुकसान का आकलन करने के बाद ही सेवाएं दोबारा शुरू की जाएंगी।

 रिपोर्टों के अनुसार, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत में दो से तीन दिन लग सकते हैं, हालांकि मौसम की स्थिति और नुकसान की वास्तविक स्थिति के आधार पर समय बढ़ भी सकता है। 

यात्रियों की सुरक्षा पर रेलवे का जोर

यह रेललाइन हिमाचल की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है और यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त कालका-शिमला रेलवे नेटवर्क का हिस्सा है। पहाड़ी क्षेत्र में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण इस मार्ग पर परिचालन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल रेलवे की प्राथमिकता क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करना और यात्रियों की आवाजाही सामान्य करना है। 

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