(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) : सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण की वजह से बदरंग हो रहे विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त् करते मंगलवार को सरकार को आड़े हाथ लिया और कहा, ‘शायद आपको परवाह नहीं है।’ न्यायालय ने आगरा स्थित इस प्राचीन विश्व विख्यात धरोहर को गरिमा बहाल करने के लिये तत्काल आवश्यक कदम उठाने के सरकार को निर्देश दिये हैं। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि यह स्मारक पहले पीला पड़ रहा था और अब यह भूरा और हरा हो रहा है। इसके साथ ही पीठ ने ताजमहल के संरक्षण के लिये उचित कदम नहीं उठाने पर संबंधित प्राधिकरणों को फटकार भी लगाई। शीर्ष अदालत ने केन्द्र से कहा कि पहले वह ताजमहल को हुये नुकसान के आकलन के लिये भारत और विदेशों के विशेषज्ञों की सहायता ले और फिर 17 वी सदी के सफेद संगमरमर से बने इस स्मारक की स्थिति बहाल करने के लिये कदम उठाये। पीठ ने ताजमहल की हालिया तस्वीरों का अवलोकन करते हुये टिप्पणी की, ‘दुनिया का आठवां अजूबा अब यह बन रहा है। पहले यह पीला हुआ और अब यह भूरा और हरा हो रहा है। न्यायालय में उपस्थित अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से पीठ ने सवाल किया कि ताजमहल का रंग क्यों बदल रहा है। नाडकर्णी ने जवाब दिया कि ताजमहल का प्रबंधन पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को करना होता है। हालांकि, जनहित याचिका दायर करने वाले पर्यावरणविद अधिवक्ता महेश चन्द्र मेहता ने कहा कि प्राधिकारियों ने ताज के संरक्षण के बारे में शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया जिसकी वजह से विश्व प्रसिद्ध स्मारक की दयनीय स्थिति हो गयी है।उन्होंने कहा कि ताजमहल के बदरंग होने के अलावा संगमरमर पर धब्बे पड़ रहे हैं और हाल ही में इसकी एक मिनार नीचे गिर गयी थी। इस पर पीठ ने प्राधिकारियों से कहा, ‘हमें नहीं मालूम कि क्या आपके पास विशेषज्ञता है या शायद नहीं है। यदि आपके पास विशेषज्ञता है भी तो आप इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। या शायद आपको परवाह नहीं है।’पीठ ने कहा कि अगर आपने यह फैसला नहीं कर लिया हो कि ताज को जाने दो तो शायद हमें इसके भारत से बाहर के किसी विशेषज्ञ संगठन की आवश्यकता है आप भारत और बाहर से विशेषज्ञों की सेवा ले सकते हैं। पीठ ने कहा कि भारत आने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री सहित दुनिया के अनेक देशों के प्रमुख और दूसरी हस्तियां ताजमहल देखने जाते हैं और न्यायालय यह मानता है कि प्राधिकारी इस स्मारक को संरक्षित रखना चाहते हैं। साथ ही पीठ ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि आप असहाय हैं। कृपया इसके बारे में सोचिये। धन समस्या नहीं है। इसके लिये कुछ दक्षता की आवश्यकता है। पहले नुकसान का आकलन कीजिये और फिर इसे कैसे बहाल करें।’नाडकर्णी ने पीठ से कहा कि इंटैक जैसी विशेष दक्षता वाली संस्थायें देश में हैं जिसने गोवा में पुराने किले को संरक्षित रखने के लिये काम किया है। इस पर न्यायालय ने कहा, ‘ताज की तस्वीरों से लगता है कि इसके लिये इच्छा शक्ति का अभाव है। आप देश के भीतर से ही या फिर बाहर से विशेषज्ञ की सेवायें लेने के बारे में सोचिए। इसके साथ ही न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई नौ मई के लिये स्थगित कर दी। पीठ ने नाडकर्णी और अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से जानना चाहा, ‘आप आखिरी बार ताजमहल देखने कब गये थे। इस पर दोनों ने ही जवाब दिया कि ‘एक दशक से भी ज्यादा हो गया है। पीठ ने दोनों से कहा, ‘बेहतर होगा कि आप जायें और खुद देखें।’ सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि ताजमहल खस्ता हालत में है। आगरा में यमुना नदी खत्म हो गयी है। शीर्ष अदालत के आदेशों की अवहेलना हो रही है। अतिक्रमण हो रहा है और यहां तक कि उद्योग भी लग गये हैं।