नॉर्थ कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे परमाणु और मिसाइल परीक्षणों को लेकर अब भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का बयान आया है। सुषमा स्वराज ने कहा है कि नॉर्थ कोरिया के परमाणु प्रसार के लिंक की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके पीछे जो भी हैं उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
दूसरे शब्दों में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उत्तर कोरिया के हालिया गतिविधियों की तीखी आलोचना की। जापान के ऊपर से शुक्रवार को उत्तर कोरिया द्वारा एक और मिड रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल की फायरिंग के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का बयान आया है।
यह माना जाता रहा है कि पाकिस्तान ने ही उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के फलने-फूलने में मदद की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि विदेश मंत्री ने उत्तर कोरिया के हालिया गतिविधियों की निंदा की और कहा कि उसके परमाणु प्रसार संबंधों की जांच की जानी चाहिए और इसमें शामिल देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
बता दें कि एक के बाद एक अमेरिकी प्रशासन को सीआईए के इनपुट से पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के परमाणु संबंधों के बारे में जानकारी हुई। परमाणु बम के जनक माने जाने वाले अब्दुल कादिर खान ने 2004 में स्वीकार किया था कि उसने उत्तर कोरिया ही नहीं ईरान और लीबिया को भी परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अहम जानकारी बेची थी।
प्रवक्ता रवीश कुमार ने रिपोर्टर को बताया, ‘विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उत्तर कोरिया की हालिया गतिविधियों की निंदा की और कहा कि इसके परमाणु प्रसार संबंधों की जांच की जानी चाहिए और इसके पीछे जो भी हो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए।‘ संरा महासभा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन व अपने जापानी समकक्ष टारो कोनो से मुलाकात के बाद स्वराज ने यह बयान दिया। हालांकि उन्होंने अपने बयान में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया।
एक सवाल के जवाब में कुमार ने देश का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि संकेत काफी हैं स्पष्टीकरण के लिए। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि मैं आपको पर्याप्त सामग्री दे रहा हूं ताकि यह पता लगा सकें कि मैं किसकी बात कर रहा हूं। उन्होंने कहा, ‘हमने बहुत स्पष्ट तौर पर यह कहा है कि हम केवल उत्तर कोरिया के हालिया गतिविधियों की निंदा नहीं कर रहे, बल्कि यह भी कह रहे हैं कि परमाणु प्रसार संबंधी गतिविधियों का पता लगाया जाना चाहिए और इसके लिए जो जिम्मेदार हैं, उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।‘
इसके अलावा तीनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा एवं कनेक्टिविटी के मुद्दे पर चर्चा हुई। तीनों देशों के बीच पहली त्रिपक्षीय मंत्री स्तरीय बैठक वर्ष 2015 में हुई थी। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर बैठक 2011 से हो रही है।