संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर जोरदार बहस

(न्यूज़लाइवनाउ-India) संसद के विशेष सत्र में आज महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक को लेकर अहम चर्चा शुरू हुई। सरकार ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसके तहत महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें देने का प्रावधान लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। 

इस मुद्दे पर लोकसभा में 16 और 17 अप्रैल को लंबी चर्चा तय की गई है, जिसके बाद मतदान होगा। वहीं राज्यसभा में इस पर 18 अप्रैल को विचार-विमर्श और वोटिंग होगी। 

2029 से लागू होगा आरक्षण

सरकार की योजना है कि यह कानून 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाए। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। यह आरक्षण सीमित अवधि (लगभग 15 साल) के लिए लागू रहेगा और हर चुनाव में आरक्षित सीटों को बदला जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को मौका मिल सके।

 लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव संभव

संशोधन प्रस्ताव में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाने की बात भी शामिल है। मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर करीब 850 तक करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग-अलग सीटें तय होंगी। 

इसके लिए संविधान के प्रावधानों में बदलाव और परिसीमन (सीटों का पुनर्निर्धारण) की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित हो सकती है। 

बिल पास होने के बाद एक परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो नए सिरे से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करेगा। इस आयोग में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। आयोग की रिपोर्ट पर जनता से सुझाव लिए जाएंगे और फिर सरकार की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा।

इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने कई आपत्तियां जताई हैं। कांग्रेस और अन्य दलों ने संशोधन के खिलाफ प्रस्ताव भी पेश किए हैं। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे लागू करने के तरीके, परिसीमन प्रक्रिया और जनगणना के आंकड़ों को लेकर सवाल हैं। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में राजनीतिक लाभ के लिए यह कदम उठा रही है। 

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर संसद में बोल सकते हैं, जबकि गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देंगे। केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्ष से अपील की है कि वे इस बिल का समर्थन करें, क्योंकि यह महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी देने का अवसर है।

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