अमेरिकी एक्सपर्ट ने कहा: चीन के खिलाफ खड़े होने वाले मोदी दुनिया के अकेले नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के ‘बॉर्डर एंड रोड इनिशिएटिव’ (बीआरआई) के खिलाफ आवाज उठाने वाले अकेले ग्लोबल लीडर हैं जबकि अमेरिका ने भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगातार चुप्पी साधे रखी है। चीन मामलों पर अमेरिका के एक शीर्ष विशेषज्ञ ने यह बात कही है। कांग्रेस की सुनवाई के दौरान प्रतिष्ठित थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में निदेशक माइकल पिल्सबरी ने सांसदों से कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ मोदी और उनकी टीम ने हमेशा खुलकर अपनी बात रखी है।

अमेरिका चुप मोदी मुखर

पिल्स्बरी ने कहा- हाल तक अमेरिका भी चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट पर चुप्पी साधे रहा. लेकिन मोदी और उनकी टीम चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के खिलाफ काफी मुखर रही है. हालांकि, इन्होंने कहा कि कुछ हद तक ऐसा इसलिए भी है क्योंकि चीन का यह प्रोजेक्ट भारतीय संप्रभुता का उल्लंघन करता है.

इंडो-पसिफिक स्ट्रैटिजी के लिए ट्रंप प्रशासन की तारीफ

पेंटागन के इस पूर्व अधिकारी ने नई इंडो-पसिफिक स्ट्रैटिजी के लिए ट्रंप प्रशासन की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में लोगों ने ट्रंप प्रशासन और खुद राष्ट्रपति द्वारा ‘मुक्त और खुले’ इंडो-पसिफिक इलाके बारे में 50 से अधिक बार सुना है. चीन इस कॉन्सेप्ट को लेकर हमलावर है और उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं. हालांकि, मोदी और ट्रंप इंडो-पसिफिक स्ट्रैटिजी को लेकर गंभीर हैं.

अमेरिका की हिन्द-प्रशांत क्षेत्र पर नई रणनीति की सराहना करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के पूर्व अधिकारी ने कहा कि हाल ही में लोगों ने राष्ट्रपति ट्रंप सहित प्रशासन के सदस्यों को 50 से अधिक बार ‘स्वतंत्र एवं मुक्त’ हिन्द-प्रशांत क्षेत्र की बात कहते सुना है। चीन मामलों पर अमेरिका के शीर्ष विशेषज्ञ माने जाने वाले पिल्सबरी ने कहा, ‘‘चीन इसका पहले ही विरोध कर चुका है। उसे यह पसंद नहीं है।’

 

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