अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी तक टाली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया।चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सोमवार को 2010 में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर विचार किया

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में विवादित जमीन के मालिकाना हक के मामले में सुनवाई जनवरी तक टाल दी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा- इसे जल्द सुनवाई किए जाने वाले मामलों के तहत नहीं सुना जा सकता, हमारी प्राथमिकताएं अलग हैं। इस मामले में गठित की जाने वाली उचित बेंच ही तय करेगी कि सुनवाई जनवरी, फरवरी मार्च या अप्रैल कौन से महीने में शुरू होती है। हम इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।इससे पहले उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की गंभीरता और लंबे समय से लंबित होने का हवाला देकर दिवाली की छुट्टी के बाद सुनवाई का अनुरोध किया। वहीं, रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने नवंबर में सुनवाई की गुहार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया।चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सोमवार को 2010 में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर विचार किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तीन पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। 27 सितंबर को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने विवादित भूमि के मामले की सुनवाई नई बेंच में करने का आदेश दिया था।
पिछली सुनवाई के दौरान इस्माइल फारुखी के मामले में 1994 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र आया था। फारुखी मामले में दिए फैसले में कहा गया था कि नमाज के लिए मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। इस फैसले को भी पुनर्विचार के लिए पांच जजों की संवैधानिक बेंच के पास भेजने की अपील की गई थी। जिसे जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने नकार दिया था। जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा था- विवादित भूमि के मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर से नई बेंच करेगी। इसके अलावा इस मामले में सुनवाई सबूतों के आधार पर होगी, पुराने फैसले की इस मामले में कोई प्रासंगिकता नहीं है।जस्टिस मिश्रा की बेंच ने 2:1 के बहुमत से ये फैसला दिया था। जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने दोनों जजों से अलग दिए अपने फैसले में कहा था- संवैधानिक बेंच फैसला करे कि धर्म के लिए अनिवार्य परंपरा क्या है और इसके बाद ही अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनवाई होनी चाहिए। क्या नमाज के लिए मस्जिद इस्लाम का अटूट हिस्सा है? इसका फैसला धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए और इसके लिए विस्तृत विवेचना की आवश्यकता है।

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