आम चुनाव 2019 से पूर्व अपने अंतिम पूर्ण बजट में मोदी सरकार दलितों और आदिवासियों के लिए खजाना खोल सकती है। सरकार आम बजट 2018-19 में एससी और एसटी के विकास के लिए आवंटन बढ़ाकर रिकॉर्ड डेढ़ लाख करोड़ रुपये कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार केंद्रीय बजट में दलितों और आदिवासियों के लिए धन आवंटन करने की ‘एससी सब प्लान और एसटी सब प्लान’ की पुरानी व्यवस्था को बदलकर नया फॉर्मूला और नए दिशा-निर्देश अपनाने जा रही है, जिससे इन वर्गों के विकास कार्यों के लिए आवंटित धनराशि में भारी भरकम वृद्धि हो जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि नीति आयोग में सामाजिक क्षेत्र के प्रिंसिपल एडवाइजर रतन पी. वतल ने ‘डेवलपमेंट एक्शन प्लान फॉर एससी और एसटी’ के रूप में नए दिशानिर्देश तैयार किए हैं। इसमें बाकायदा प्रत्येक मंत्रालय के लिए एससी और एसटी आवंटन की सीमा निश्चित की गई है। नीति आयोग ने इन दिशा निर्देशों को सोमवार को भारत सरकार के 45 विभागों और मंत्रालयों को भेजा गया है, ताकि मंत्रालय अगले बजट की तैयारी करते समय अपनी-अपनी योजनाओं में से निश्चित धनराशि दलितों और आदिवासियों के लिए आवंटित कर सके।
सूत्रों ने कहा कि फिलहाल कई मंत्रालय ऐसे हैं जो दलितों और आदिवासियों के लिए अलग से बजट राशि आवंटित नहीं करते हैं। वतल की सिफारिशों के बाद इन मंत्रालयों को अपने बजट की 8.30 फीसदी धनराशि एससी और 4.30 फीसदी राशि एसटी के लिए अलग से आवंटित करनी पड़ेगी। सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार में कौशल विकास और उद्यमिता नया मंत्रालय बना है, इसको भी दलितों के लिए 16.60 फीसदी और आदिवासियों के लिए 8.60 फीसदी धनराशि आवंटित करनी होगी। इसी तरह पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को अपने बजट की 8.60 फीसदीधनराशि आदिवासियों के विकास लिए आवंटित करनी होगी।