इलाहाबाद बना प्रयागराज, लेकिन इन ख़ूनी विदेशी आक्रांताओं के नाम वाले शहरों का क्या ?

यह ध्यान देने योग्य बात है की इलाहबाद का नाम प्रयागराज रखने की घोषणा योगी आदित्यनाथ सरकार ने 15 अक्टूबर को की जिस दिन मुग़ल शासक अकबर का जन्म हुआ था। 1575 में हिंदुओं की संस्कृति को मिटाने के उदेशय से मुग़ल तानाशाह अकबर ने प्रयागराज का नाम बदल कर 'इलाहबस' कर दिया, जिसका अर्थ होता है 'अल्लाह का स्थान'।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी। कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, ‘इलाहबाद आज से प्रयागराज के नाम से जाना जाएगा।’ स्थानीय लोग और संत समुदाय लंबे समय से इस शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने की मांग कर रहा था। योगी सरकार ने भी कुछ दिनों पहले कहा कि वह इस शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बारे में विचार कर रही है।यह ध्यान देने योग्य बात है की इलाहबाद का नाम प्रयागराज रखने की घोषणा योगी आदित्यनाथ सरकार ने 15 अक्टूबर को की जिस दिन मुग़ल शासक अकबर का जन्म हुआ था। 1575 में हिंदुओं की संस्कृति को मिटाने के उदेशय से मुग़ल तानाशाह अकबर ने प्रयागराज का नाम बदल कर ‘इलाहाबस’ कर दिया, जिसका अर्थ होता है ‘अल्लाह का स्थान’।

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प्रयागराज का पौराणिक महत्व और इतिहास 

दरअसल ऐतिहासिक और पौराणिक दोनों ही रूप से प्रयागराज समृद्ध है।इस शहर को ब्रह्मा की यज्ञस्थली के रूप में जाना जाता है। पुराणों में कहा गया है, ”प्रयागस्य पवेशाद्वै पापं नश्यति: तत्क्षणात्।” अर्थात् प्रयाग में प्रवेश मात्र से ही समस्त पाप कर्म का नाश हो जाता है । हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने इसकी रचना से बाद प्रयाग में पहला यज्ञ किया था। इसी प्रथम यज्ञ के प्र और याग यानी यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना। 1575 में हिंदुओं की संस्कृति को मिटाने के उदेशय से मुग़ल तानाशाह अकबर ने प्रयागराज का नाम बदल कर ‘इलाहबस’ कर दिया, जिसका अर्थ होता है ‘अल्लाह का स्थान’।अकबर ने अपना शासन स्थानीय हिंदुओं पर थोपने हेतु इलाहाबाद किले का निर्माण कराया।मुग़ल तानाशाह शाह जहान के काल में इसका नाम फिर बदल कर इलाहाबाद कर दिया गया।

  

प्रयागराज जैसे ही भारत में अनेक ऐसे शहर है जिनके नाम भारत पर हमला करने वाले मुस्लिम शासकों द्वारा भारतीय पहचान और हिन्दू संस्कृति को नष्ट करने हेतु बदल दिए गए थे। भारत में ऐसे अनेक शहर है जो की दुष्ट, अधर्मी और हिन्दू विरोधी मुस्लिम राजाओं के वेश में छुपे लूटेरों के नाम पर रखे गए है। इतिहास इन शासकों के कुकर्मों का गवाह है। इन शहरों के नाम आज भी भारत के उस दर्दनाक इतिहास की याद दिलाते है जब विदेशी मुस्लिम लूटेरों ने भारत आकर हिन्दू संस्कृति और धर्म को नष्ट करने के महत प्रयास किये थे।वह ऐसा काल था जब भारत में सोमनाथ जैसे लाखों मंदिरों को जिहाद के नाम पर मुस्लिम हमलावरों ने नष्ट कर दिया। जिहाद के नाम पर लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम और जबरजस्ती धर्म परिवर्तन कराया गया। समस्त भारत वर्ष म्लेच्छ मुस्लिम साम्राज्य की काली छाया से ढका हुआ था।

औरंगाबाद : औरंगाबाद का नाम मुग़ल शासक औरंगज़ेब के नाम पर रखा गया था। औरंगज़ेब ने अपने शासनकाल में हजारों हिन्दुओं का कत्लेआम कर हिन्दुओं के कई प्रमुख तीर्थस्थलों में स्थित मंदिरों जैसे कि वाराणसी का ‘काशी विश्वनाथ मंदिर’, मथुरा का ‘केशव देव मंदिर’ और गुजरात के ‘सोमनाथ मंदिर’ को नष्ट कर वहां मस्जिदें बनवा दी।

नष्ट हुए सोमनाथ मंदिर का वर्ष 1869 का चित्र                                                    सोमनाथ मंदिर 2018 

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मुग़लों द्वारा किए गए अत्याचारों की पेंटिंग 

‘विल दुरंत नामक प्रसिद्ध इतिहासकार ने अपनी ‘पुलित्ज़र पुरस्कार’ से सम्मानित किताब ‘The Story of Civilization’ में औरंगज़ेब के विषय में कुछ ऐसा लिखा है ,’औरंगज़ेब ने अपने साम्राज्य के सारे गवर्नरों और सरदारों को आदेश दिए की वह मुग़ल साम्राज्य में स्थित सारे हिन्दू मंदिरों को तोड़ दें, हिन्दू देवी देवताओं की सारी प्रतिमाओं को तोड़ डालें और हिन्दुओं के सारे गुरुकुल बंद करवा दें। एक साल में (1679–80) अजमेर में ६६ मंदिर तोड़े गए, चित्तोर में ६३, उदयपुर में १२३ और वाराणसी में हिन्दुओं के प्रमुख मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ कर उसकी जगह एक मस्जिद बनवाई गई। औरंगज़ेब ने हिन्दूओं को सार्वजनिक तौर से अपने धर्म का अनुसरण करने पर पाबन्दी लगा दी और मुग़ल साम्राज्य में रहने वाले हर एक हिन्दू पर जजिया नामक एक कर थोप दिया’ ( जजिया नाम का एक कर हिन्दुओं से मुग़ल शासक बस कोई व्यक्ति हिन्दू है और मुस्लिम धर्म का अनुसरण नहीं करता इसलिए वसूलते थे )’

औरंगज़ेब ने हिन्दुओं और हिन्दू संस्कृति पर अनगिनत अत्याचार किए। इसके बावजूद महाराष्ट्र में औरंगाबाद का नाम अभी भी औरंगज़ेब के नाम पर रखा गया है, जबकि उसका वास्तविक नाम पुरातन काल से ‘खड़की’ था।

अहमदाबाद 2018

अहमदाबाद : अहमदाबाद का वास्तविक नाम ‘कर्णावती’ था। कर्णावती नाम गुजरात के चालुक्य राजा कर्ण के नाम पर रखा गया था। शहर की स्थापना ११ वी शताब्दी में हुई थी जब चालुक्य राजा कर्ण ने भील राजा अहावल को युद्ध में परास्त कर साबरमती नदी के किनारे पर स्थित अशावल शहर का नाम बदल कर कर्णावती कर दिया। ४ शतकों तक इसका यही नाम रहा लेकिन साल १४११ में यह शहर लूटेरे सुल्तान अहमद शाह के कब्जे में आ गया। फिर इसका नाम बदल कर अहमदाबाद रखा गया। अहमद शाह द्वारा हिन्दुओं पर अनेक अत्याचार किए गए  और रूद्र महालय मंदिर को नष्ट कर वहां मस्जिद का निर्माण करवाया गया।

नष्ट हुए रूद्र महालय मंदिर की पुरानी फ़ोटो

‘काशी विश्वनाथ मंदिर’ औरंगज़ेब द्वारा नष्ट कर वहां मस्जिद बनाई गई, 

पुराने मंदिर के हिस्से आज भी मस्जिद के ढांचे में दिखाई देते हैं’

बख्तियारपुर : बख्तियारपुर का नाम इख़्तियार अल दिन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी नामक एक मुस्लिम हमलावर और दुष्ट शासक कुतुबुद्दीन एबक के सैन्य सलाहकर पर रखा गया था। 1193 में बख्तियार खिलजी ने हिन्दू और बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय को पूरी तरह नष्ट कर वहां की लाखों पांडुलिपियों और क़िताबों को आग के हवाले कर दिया।इसके बाद बख्तियार खिलजी की सेना द्वारा वहां के सारे ब्राम्हणों का कत्ल करवा दिया गया। नालंदा विश्वविद्यालय अपने काल का दुनिया में सबसे बड़ा विद्यालय था।

नष्ट हुए नालंदा विश्वविद्यालय का वर्तमान फ़ोटो 

यहां 10000 से ज्यादा छात्र दर्शन, योग, ज्योतिष, तंत्र, आयुर्वेद, रसायन आदि विषयों पर ज्ञान प्राप्त किया करते थे। इसके आलावा उनके साथ 2000 शिक्षक भी रहा करते थे। नालंदा विश्वविद्यालय भारतीय धर्म और संस्कृति का एक अभिन्न अंग था।

अलीगढ़ : अलीगढ का वास्तविक नाम कोइल था। इसे मुग़ल शासक शाह आलम के सेना प्रमुख नजाफ़ खान द्वारा बदल कर अलीगढ़ कर दिया गया था।

करीम नगर : करीम नगर का वास्तविक नाम कोटिल्लिन्गल था।यह सातवाहन साम्राज्य (230 BCE–220 CE) की राजधानी थी। इसका नाम बदल कर सय्यद कमरूद्दीन के नाम पर करीमनगर रख दिया गया।

फैजाबाद : फैजाबाद अवध के नवाब शुजा उद दौला के सलाहकार मुंशी मुहम्मद फैज़ बक्श के नाम पर रखा गया था।इस शहर की अयोध्या और राम जन्म भूमि के पास स्थापना की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इसका नाम बदल कर अयोध्या धाम रखने की मांग उठी है।

इन शहरों के आलावा ख़ूनी मुग़ल शासकों के नाम देश में 700 से ज्यादा शहरों, गावों और कस्बों को दिए गए है। अकबर जिसने चित्तौड़ किले को उदय सिंह से हथियाने के बाद वहां के 25,000 निवासी जिसमें  औरतें, बच्चे और बूढ़े भी शामिल थे उन्हें अपनी सेना द्वारा मौत के घाट उतार दिया था। कई औरतों ने मुग़लों के हाथों पड़ने से पहले जौहर करना उचित समझा । यह हमारे देश और संस्कृति के लिए अत्यंत शर्म की बात है की ऐसे मुग़ल शासक के नाम भारत में 251 अलग-अलग शहर, गांव और कस्बे हैं।

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चित्तोड क़िले का वर्तमान चित्र 

मुग़ल शासक और उनके नाम के भारत में शहर, गांव और क़स्बों की गिनती  –

बाबर – 61

हुमायूँ – 11

अकबर – 251

जहांगीर –  141

शाह जहान – 63

औरंगज़ेब – 77

अन्य मुग़ल शासक जिन्होंने अपने शासन काल में लाखों हिन्दुओं का कत्ल किया, लाखों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया, हजारों मंदिर तोड़े, हिन्दू धर्म और संस्कृति को नष्ट करने के अनेक प्रयास किये, ऐसे शासकों के नाम आज भी हमारे देश में 700 से ज्यादा शहर और गांव है !

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