हाई कोर्ट के लैंगिक प्रतिबंध खत्म करने संबंधी नवंबर में दिए गए आदेश के बाद नेय्यार वन्यजीव सेंचुरी में स्थित अगस्त्यार्कुडम को पहली बार वार्षिक पर्वतारोहण के लिए खोला गया है। पहाड़ की तलहटी में रहने वाले आदिवासी कानी समुदाय के लोगों ने महिला की चढ़ाई का विरोध किया। सौ से भी ज्यादा आदिवासी समुदाय के लोग बोनाकाउड में इकट्ठा हुए और लोकगीत गाते हुए विरोध जताया। आदिवासी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मोहनन त्रिवेणी ने कहा, ‘अगस्त्य चोटी की रीति-रिवाजों को तोड़ने पर हमने अपने दर्द और गुस्से के इजहार के लिए प्रदर्शन किया। हमने किसी भी पर्वतारोही को जांचने की कोशिश भी नहीं की, क्योंकि हम अदालत का सम्मान करते हैं।’ पर्वतारोहण कराने वाले वन विभाग ने बताया कि कुल 4700 लोगों ने इस साल पंजीकरण कराया है। इनमें 100 महिलाएं शामिल हैं। वर्ष 2015 में एक महिला समूह ने गौर किया कि वन अधिकारियों ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों व महिलाओं को वार्षिक ट्रैकिंग में भाग लेने से रोकने के लिए एक नोटिस जारी किया था। एम सुल्फथ की अगुवाई वाली पेनोरूमा और पूर्व नक्सली के अजीता की अन्वेषी नामक संस्था ने यहां महिलाओं को एकजुट किया। बाद में लैंगिग भेदभाव के खिलाफ उन्होंने कोर्ट का रुख कर दिया।