डेबिट कार्ड, भीम यूपीआई के दो हजार तक के ट्रांजैक्शन पर सब्सिडी

डेबिट कार्ड के जरिए दो हजार रुपये की खऱीद में आसानी होगी क्योंकि सरकार ने डेबिट कार्ड के साथ ही भीम यूपीआई या फिर आधार आधारित भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल कर 2 हजार रुपये तक के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआऱ के लिए सब्सिडी देने का फैसला किया है. एमडीआर को ट्रांजैक्शन फीस के नाम से भी जाना जाता है.



एमडीआर को दूसरे शब्दों में ट्रांजैक्शन फीस भी कहते हैं. ये रकम कार्ड जारी करने वाली वित्तीय संस्था लेती है. बड़े दुकानों, मॉल, होटल वगैरह इस फीस का बोझ खुद ही उठाते हैं जबकि छोटे और मझौले दुकानदार ये पैसा ग्राहकों से लेते हैं. एमडीआर की व्यवस्था में बैंक या वित्तीय संस्था प्राप्त भुगतान में से कुछ रकम काटकर बाकी पैसा कारोबारी को अदा करते हैं, इसीलिए इस फीस को मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी कारोबारियों को भुगतान की जाने वाली रकम में कटौती की दर के नाम से जाना जाता है.

कैबिनेट की फैसले के मुताबिक, एमडीआर पर सब्सिडी की व्यवस्था पहली जनवरी से लागू होगी और दो साल तक लागू रहेगी. नई व्यवस्था में सब्सिडी का भुगतान बैंक या भुगतान व्यवस्था मुहैया कराने वाली संस्था को मुहैया करायी जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे ग्राहकों और दुकानदारों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. नतीजतन डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा. एक अनुमान है कि दो हजार रुपये से कम लेन-देन के लिए एमडीआर पर सब्सिडी के मद में 1050 करोड़ रुपये का भुगतान 2018-19 और 1,462 करोड़ रुपये का भुगतान 2019-20 में किया जाएगा.




पहली जनवरी से ही एमडीआर की नई व्यवस्था लागू की जा रही है. इसमें लेन-देन की रकम के बजाए कुल कारोबार को एमडीआर का आधार बनाया गया है. साथ ही प्वाइंट ऑफ सेल्स यानी पॉस मशीन और क्विक रिस्पांस यानी क्यू आर कोड के लिए दरें अलग-अलग कर दी यी है. हालांकि कारोबारी नई व्यवस्था से खुश नहीं है और उनका कहना है कि इससे उनपर बोझ बढ़ेगा और अंत में ये ग्राहकों को ही उठाना पड़ेगा. यदि ऐसा हुआ तो डिजिटल लेन-देन पर असर पड़ेगा. इसी सब को देखते हुए सरकार ने छोटे लेन-देन के लिए सब्सिडी का फैसला किया है.

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