दुनियाभर की बड़ी तेल कंपनियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने की मीटिंग।
प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम उत्पादक देशों से कच्चे तेल के आयात की भुगतान शर्तों की समीक्षा पर जोर दिया ताकि आयातक देशों की स्थानीय मुद्रा को कुछ राहत मिल सके।
(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तेल पर महाबैठक की। इंडिया एनर्जी फोरम में दुनिया और भारत की बड़ी तेल और गैस कंपनियों के सीईओज को संबोधित किया। पीएम की तेल क्षेत्र के दिग्गजों के साथ यह तीसरी सालाना बैठक हुई है। इसमें सउदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद ए अल-फलिह और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री उपस्थित थे। इसके अलावा प्रमुख तेल कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारी और विशेषज्ञ भी बैठक में शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम उत्पादक देशों से कच्चे तेल के आयात की भुगतान शर्तों की समीक्षा पर जोर दिया ताकि आयातक देशों की स्थानीय मुद्रा को कुछ राहत मिल सके। उन्होंने सऊदी अरब से लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत दुनियाभर की तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक में उनसे तेल की कीमत डॉलर की जगह रुपये में चुकाने की पेशकश की। उन्होंने तेल उत्पादक देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि कच्चे तेल के ऊंचे दाम से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। दरअसल, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों एवं विभिन्न वैश्विक मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट की वजह से रुपये लगातार टूट रहा है। सरकार के पास पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को थामने के कुछ खास विकल्प बचे नहीं हैं। एनडीए सरकार ने इसी महीने डीजल-पेट्रोल के दाम में प्रति लीटर 2.50 रुपये की कटौती का ऐलान किया था। उसकी अपील पर बीजेपी शासित राज्यों ने भी 2.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयास 10 दिनों में ही धूमिल हो गए और अब दोनों कटौतियों के बराबर दाम बढ़ चुके हैं। मोदी सरकार ने 2015 में न्यू एक्सप्लोरेशन ऐंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (NELP) की जगह हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन ऐंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) लाई थी। इसके जरिए सरकार ने तेल कंपनियों को सेस के भुगतान से मुक्ति दे दी थी। साथ ही, उन्हें विदेशी तेल कंपनियों को अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने की अनुमति भी मिल गई थी। लेकिन, इन प्रयासों के कुछ खास नतीजे नहीं दिखे। इसलिए प्रधानमंत्री ने तेल कंपनियों के सीईओज से पूछा कि पिछली बैठक में उन्होंने जो सुझाव दिए थे, सरकार की तरफ से उन पर अमल किए जाने के बावजूद तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन क्षेत्र में नया निवेश क्यों नहीं आ रहा है। इस बैठक में सऊदी अरब और यूएई के मंत्री तथा आरामको, एडीएनओसी, बीपी, रास्नेफ्ट, आईएचएस मार्किट, पायनीयर नैचरल रिसोर्सिज कंपनी, एतसन इलेक्ट्रिक कंपनी, टेलूरियन मुबाडला इन्वेस्टमेंट कंपनी सहित तेल खेत्र की कई कंपनियों के सीईओ और विशेषज्ञ शामिल हुए। इनके अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली, पेट्रलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार और सरकार तथा नीति आयोग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सूत्रों के अनुसार दो घंटे लंबी चली इस बैठक में बीपी के सीईओ बाब दुडले, टोटल के प्रमुख पेट्रिक फायेन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के निदेशक पीएमएस प्रसाद और वेदांता प्रमुख अनिल अग्रवाल भी मौजूद रहे।बातचीत के दौरान बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने खासकर ऊर्जा क्षेत्र में कारोबार सुगमता के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बैठक में कहा, ‘कच्चे तेल के बढ़ते दाम से भारत के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो रही है। पिछले एक साल में कच्चे तेल के दाम डॉलर के लिहाज से 50 प्रतिशत और रुपये के लिहाज से 70 प्रतिशत बढ़ चुके हैं।’