दुश्मन की मिसाइलों के खिलाफ भारत बना रहा रूस की मदद से अभेद्य सुरक्षा कवच
दुश्मन की मिसाइलों को 300 किमी रेंज में नष्ट करेगा रूस से खरीदा गया एस-400 ट्रंफ मिसाइल सिस्टम
(न्यूज़ लाइव नाऊ) : भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के आकाश से आने वाली मिसाइलों से भी निपटने के लिए तैयार हो रहा है। दुश्मन की मिसाइलों से निपटने के लिए और भारतीय सीमा में घुस रहे मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर देने के लिए भारत अब अपनी कमर कस रहा है। इस काम के लिए रूस के साथ एस-400 ट्रंफ मिसाइल सिस्टम पर खरीदी की बात भारत सरकार कर रही है।
इस गेम चेंजर मिसाइल सिस्टम पर PM नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 2016 के ब्रिक्स समिट के दौरान गोवा में बातचीत हुई थी। यह मिसाइल सिस्टम गेम चेंजर सिस्टम कहा गया है और यह भारत के एयर डिफेंस को काफी मजबूत करेगा। एस 400 मिसाइल सिस्टम काफी अचूक माना जाता है, और यह 100 से 300 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन की मिसाइल को पहचान कर नष्ट कर सकता है। इस सिस्टम में सुपर सोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइल हैं, जिनका प्रमुख काम दुश्मन की मिसाइल को पहचान कर बीच में ही नष्ट करना है। रूस के साथ इस मिसाइल सिस्टम का सौदा $39000 का है। डील के फाइनल होने के बाद रूस इस मिसाइल सिस्टम को 2 वर्षों के भीतर डिलीवर करेगा। एस-400 ट्रंफ मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है जिसमें क्रूज़ मिसाइलों के साथ मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी रूस की ओर से 54 माह के अंदर होगी। इस मिसाइल सिस्टम के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भारत की सीमाएं काफी सुरक्षित हो जाएंगी।
इस गेम चेंजर मिसाइल सिस्टम पर PM नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 2016 के ब्रिक्स समिट के दौरान गोवा में बातचीत हुई थी। यह मिसाइल सिस्टम गेम चेंजर सिस्टम कहा गया है और यह भारत के एयर डिफेंस को काफी मजबूत करेगा। एस 400 मिसाइल सिस्टम काफी अचूक माना जाता है, और यह 100 से 300 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन की मिसाइल को पहचान कर नष्ट कर सकता है। इस सिस्टम में सुपर सोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइल हैं, जिनका प्रमुख काम दुश्मन की मिसाइल को पहचान कर बीच में ही नष्ट करना है। रूस के साथ इस मिसाइल सिस्टम का सौदा $39000 का है। डील के फाइनल होने के बाद रूस इस मिसाइल सिस्टम को 2 वर्षों के भीतर डिलीवर करेगा। एस-400 ट्रंफ मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है जिसमें क्रूज़ मिसाइलों के साथ मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी रूस की ओर से 54 माह के अंदर होगी। इस मिसाइल सिस्टम के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भारत की सीमाएं काफी सुरक्षित हो जाएंगी।