नासा ने खोजे तीन नए ‘एक्सोप्लैनेट’।

नासा के विज्ञानिको ने तीन नए 'एक्सोप्लैनेट' खोजे हैं ।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नासा के वैज्ञानिकों ने तीन नए ‘एक्सोप्लैनेट’ का पता लगाया है। एक्सोप्लैनेट ऐसे ग्रह होते हैं जो हमारे सौर मंडल के बाहर स्थित हैं और किसी तारे के चारों को घूमते रहते हैं। नेचर एस्ट्रोनॉमी नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, तीनों ग्रहों में से एक ग्रह चट्टानी और पृथ्वी से थोड़ा-सा बड़ा है, जबकि दो अन्य गैसीय और हमारे ग्रह के आकार से दोगुने हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, रिवरसाइड के शोधकर्ताओं ने कहा कि नासा के ‘हंटिंग सेटेलाइट’ से खोजी गई नए तारों की प्रणाली, जिसे टीईएसएस ऑब्जेक्ट ऑफ इंटरेस्ट या टीओआइ-270 कहा जाता है, बिल्कुल वैसी ही है जैसी ट्रांसिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सेटेलाइट (टीईएसएस) को खोजने के लिए डिजाइन की गई थी। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये ग्रह रहने के लिए अनुकूल हो सकते हैं, क्योंकि ये अपने तारे से इतनी दूरी पर स्थित हैं कि तारों की गर्मी से यहां के महासागरों में पानी तरल रूप में मिल सकता है और टीओआइ-270 तारे के पास स्थित होने के कारण देखने के लिहाज से ये ग्रह चमकीले भी हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि इसका मतलब है कि इसमें कुछ ऐसे भी भाग हैं जो वैज्ञानिकों को इसकी परिक्रमा करने वाले ग्रहों की आसानी से निगरानी करने में मदद कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के केन ने कहा कि जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों वाले इस क्षेत्र में हमने कुछ ऐसे ग्रह खोजे हैं और यह दुर्लभ संयोग ही है कि ये ग्रह ऐसे तारे के पास हैं जो शांत है। उन्होंने कहा कि हमारे सौर मंडल में ऐसा कोई ग्रह मौजूद नहीं है। हमारे सौर मंडल में, पृथ्वी, बुध, शुक्र और मंगल जैसे छोटे, चट्टानी ग्रह हैं, या शनि, बृहस्पति, यूरेनस, और नेप्च्यून जैसे बड़े ग्रह हैं, जिनमें भूमि की तुलना में गैसों की मात्र ज्यादा है। सौर मंडल में नेप्च्यून से छोटे आकार का कोई ग्रह नहीं है, हालांकि ये अन्य तारों के आसपास छोटे ग्रहों का मिलना आम बात है।अमेरिका की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के पोस्टडॉक्टरल फेलो ने मैक्सिमिलियन गंथर ने कहा कि टीओआइ-270 जल्द ही हमें पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रहों और नेप्च्यून जैसे गैसीय ग्रहों के बीच रिलेशन  का पता लगाने में मदद करेगा ।

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