बीजेपी कैसे हासिल करेगी मिशन 180

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही प्रदेश के सत्ताधारी दल बीजेपी के विधायकों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं. साल 2013 के चुनावों में बीजेपी ने रिकॉर्ड 163 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी. लेकिन इन चुनावों के बाद हुए उपचुनावों में बीजेपी को ज्यादातर स्थानों पर हार का सामना करना पड़ा. जबकि इस बार बीजेपी 180 विधानसभा सीटों की जीत का लक्ष्य रखकर चुनाव मैदान में उतर रही है. ऐसे में विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए राह आसान नहीं होगी.विधानसभा चुनावों के बाद हुए लोकसभा चुनावों में चार विधायकों को लोकसभा की टिकट दी गई थी. वो विधायक जीत हासिल कर लोकसभा पहुंच गए, लेकिन उनके स्थानों पर हुए उपचुनावों में एक सीट को छोड़कर, तीन स्थानों पर भाजपा को अपनी सीटें गंवानी पड़ी थी. इसमें कोटा दक्षिण विधायक ओम बिरला को कोटा-बूंदी लोकसभा सीट से, वैर विधायक बहादुर सिंह कोली को भरतपुर लोकसभा से, नसीराबाद विधायक दिवंगत सांवरलाल जाट को अजमेर से और सूरजगढ़ विधायक संतोष अहलावत को झुंझुंनू से लोकसभा चुनाव लड़ाया गया था.
ये चारों विधायक चुनाव में जीतकर सांसद बनकर लोकसभा पहुंच गए, लेकिन इन चारों विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए तो कोटा दक्षिण को छोड़कर तीन सीटें भाजपा के हाथ से निकल गई. उसके बाद धौलपुर विधानसभा का चुनाव हुआ तो बीजेपी की शोभारानी कुशवाह ने चुनाव जीता. इसके बाद जनवरी में अजमेर व अलवर दो लोकसभा और भीलवाड़ा की मांड़लगढ़ विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुए तो फिर से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा.उपचुनाव में कुल 16 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का हार का मुंह देखना पड़ा. 2013 के बाद हुए विधानसभा के उपचुनाव चुनावों में भाजपा को छह सीटों में से दो पर ही जीत हासिल हुई. लेकिन दो लोकसभा सीटों के विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ दिया जाए तो कुल 20 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है. सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव-2018 के चुनावों के लिए टिकट वितरण से पहले पार्टी कई स्तरों पर सर्वे का काम करवा रही है. इससे पहले सर्वे भी करवाए जा चुके हैं.

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