सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की विलय प्रक्रिया में अब तेजी आ सकती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक बैंकों के एकीकरण में तेजी लाने के प्रारूप को आज मंजूरी दे दी। इसके तहत पहला विलय चालू वित्त वर्ष में हो सकता है। विलय की प्रक्रिया में किसी तरह के नकद सौदे नहीं होंगे बल्कि शेयरों की अदला-बदली होगी और सरकार ने भरोसा दिया है कि इस कवायद में किसी भी कर्मचारी को नौकरी नहीं गंवानी पड़ेगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मी मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर थे।
मंत्रिमंडल के इस निर्णय का असर बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों पर भी दिखा। हालांकि बैंक उम्मीद कर रहे हैं कि विलय के लिए उन पर दबाव नहीं डाला जाएगा। बैंकों के विलय प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और अन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विलय की प्रक्रिया की पहल बैंकों के बोर्डों द्वारा की जाएगी। सरकार के एक वरिष्ठï अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि कई बैंक संभावित एकीकरण के लिए बातचीत कर रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा, ‘सरकार ने कहा है कि वह विलय के लिए दबाव नहीं डालेगी। इसका निर्णय बैंकों पर छोड़ा जाएगा। अगर बैंक इसे उचित और लाभकारी मानेंगे तो वह इस दिशा में काम कर सकते हैं।’
हालांकि बुधवार को सरकार की ओर से संभावित विलय के लिए किसी का नाम नहीं लिया गया लेकिन बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जून में खबर प्रकाशित की थी कि बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक छोटे बैंकों जैसे- देना बैंक, विजया बैंक, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक का अधिग्रहण कर सकते है। जेटली ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र में काफी सारे बैंक हैं। इस कवायद का मकसद बैंकों को सुदृढ़ करना है। अब तक विलय का हमारा अनुभव सकारात्मक रहा है।’ उन्होंने कहा कि सुदृढ़ और प्रतिस्पर्धी बैंक बनाने का निर्णय विशुद्घ रूप से वाणिज्यिक आधार पर लिया जाएगा
एक अधिकारी ने कहा कि विलय का निर्णय करने और शेयर मूल्यांकन, शेयरों की अदला-बदली अनुपात तथा अल्पांश शेयरधारकों के साथ चर्चा के बाद एक्सचेंज को इस बारे में सूचित किया जाएगा। इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था और भारतीय रिजर्व बैंक विलय के प्रस्ताव की समीक्षा करेगा और विलय पर आगे बढऩे का निर्णय देगा। इस बारे में अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की ओर से लिया जाएगा। वैकल्पिक व्यवस्था विनिवेश प्रस्तावों की मंजूरी के लिए लागू ढांचे की तरह ही होगी, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निर्णय करेंगे। सूत्रों ने कहा कि वैकल्पिक तंत्र की अध्यक्षता जेटली कर सकते हैं।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रस्ताव को सैद्घांतिक मंजूरी देने के बाद बैंकों को कानून तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के नियम के मुताबिक विलय की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। विलय की अंतिम योजना को केंद्र सरकार द्वारा आरबीआई की सलाह से अधिसूचित किया जाएगा।
आमतौर पर विलय बैंकिंग कंपनियां (अधिग्रहण एवं अंडरटेकिंग्स हस्तांतरण) अधिनियम के तहत किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि इस कानून के तहत विलय की व्यवस्था है ऐसे में इस प्रक्रिया के लिए कानून में कोई संशोधन करने की जरूरत नहीं होगी। विलय में मदद के लिए वित्तीय और कानूनी सलाहकारों के लिए निविदा संबंधित बैंकों द्वारा जारी की जाएगी।
सरकार ने सार्वजनिक बैंकों में सुधार के लिए सात-आयामी इंद्रधनुष रणनीति बनाई है, जिसके तहत सरकार 2018-19 तक बैंकों में पुनर्पूंजीकरण के लिए 70,000 करोड़ रुपये देगी। इनमें से 2015-16 और 2016-17 में 25,000-25,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया जा चुका है॥ इस साल इन बैंकों में 10,000 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश का प्रस्ताव है। अधिकारियों ने कहा कि बैंकों के विलय होने से सरकारी खजाने पर पूंजीकरण की निर्भरता कम होगी।
भारतीय महिला बैंक और पांच सहायक बैंकों का भारतीय स्टेट बैंक में विलय के बाद से सार्वजनिक बैंकों के बीच विलय की प्रक्रिया जोर पकड़ रही है। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठï निदेशक कृष्णन सीतारामन ने कहा, ‘सार्वजनिक बैंकों के एकीकण की दिशा में यह सकारात्मक कदम है और इससे बैंकों को परिचालन में लाभ होगा। समान तरह के प्रदर्शन करने वाले बैंकों के विलय से गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के समाधान की रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू करने में भी मदद मिल सकती है।’ सार्वजनिक बैंकों का सकल एनपीए जून 2015 में 2,80,637 करोड़ रुपये था जो 2016 में बढ़कर 5,60,841 करोड़ रुपये हो गया और जून 2017 में यह 7,38,776 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।