जिनेवा
वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) की मात्रा काफी उच्च स्तर पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को आगाह करते हुए कहा कि पैरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित किए गए लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा, ‘वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा 2016 में रेकॉर्ड स्पीड से बढ़ी है। यह 8 लाख वर्षों में सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई है।’
आगे बताया गया कि दुनिया में CO2 का ऐवरेज कॉन्सनट्रेशन 2016 में बढ़कर 403.3 पार्ट्स पर मिलियन हो गया। जबकि 2015 में यह 400.00 ppm था। इसकी वजह मानवीय गतिविधियों के साथ-साथ अल नीनो का प्रभाव भी है। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका और सीरिया केवल दो देशों को छोड़कर बाकी सभी देश पैरिस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
मौसम से संबंधित संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की सालाना रिपोर्ट (ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन) में 1750 से वातावरण में खतरनाक गैसों की बढ़ी मात्रा के बारे में जानकारी दी गई है। WMO के वायुमंडल अनुसंधान विभाग के प्रमुख ओकसाना टेरासोवा ने जिनेवा में पत्रकारों से कहा कि शोधकर्ताओं ने 8 लाख साल पहले वातावरण में मौजूद CO2 की मात्रा का विश्वसनीय और सीधे तौर पर जानकारी जुटाने के लिए ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका जैसी जगहों पर जाकर बर्फ में सुरक्षित एयर बबल्स का इस्तेमाल किया।
जीवाश्मों का अध्ययन करने से भी एजेंसी को महत्वपूर्ण सूचना मिली है। इन सबका इस्तेमाल करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि आखिरी बार पृथ्वी पर इतनी ज्यादा CO2 करीब तीन से पांच मिलियन साल पहले थी। उस समय समुद्र का स्तर आज की तुलना में 20 मीटर (66 फीट) ज्यादा था और पृथ्वी 2-3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म थी।
WMO के चीफ पेटरी टालस ने कहा कि अब भी उम्मीद है कि इस चिंताजनक स्थिति को बदला जा सकता है और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा में कमी लाई जा सकती है पर इसके लिए कदम बढ़ाने का यही समय है।