विनोद खन्ना के साथ इस किसिंग सीन के लिए माधुरी ने जताया अफ़सोस

अपने दौर के बेहतरीन एक्टर्स में से एक विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को हुआ था. पिछले दिनों उनका निधन हो गया था. हालांकि उनके काम के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है. विनोद का करियर बेदाग़ रहा. उन्होंने कई बेजोड़ फिल्म की. लेकिन एक फिल्म के इंटीमेट सीन की वजह से उनकी काफी आलोचना हुई. जिस एक्ट्रेस के साथ ये सीन था, उन्होंने भी बाद में इस पर अफसोस जताया. 1968 में आई फिल्म ‘मन का मीत’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. अपने करियर में उन्होंने करीब 150 फिल्मों में काम किया. फिल्म ‘कुर्बानी’ के लिए 1981 में उन्हें बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला था. 1999 में वो लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजे गए थे. वो भाजपा से जुड़े और 1999 में चुनाव जीतने के बाद उन्हें पर्यटन, विदेश राज्यमंत्री जैसे पद मिले.

 विनोद खन्ना की निजी जिंदगी हमेशा सुर्खियों में रही है. लेकिन वो भी कुछ विवादों से बच नहीं पाए थे.चाहे वह घर छोड़कर ओशो की शरण में जाना हो या अपने से 16 साल छोटी कविता से दूसरी शादी करना हो. उन्होंने 1971 में अपनी बचपन की दोस्त गीतांजलि से पहली शादी की थी. उनके दो बेटे अक्षय और राहुल खन्ना हैं. विनोद की शादीशुदा जिंदगी में तब भूचाल आया जब उन्होंने परिवार को छोड़कर संन्यास लेने का फैसला किया.

बात उस दौर की है जब विनोद खन्ना संन्यासी जीवन छोड़कर वापस लौटे थे. 1988 में आई फिल्म ‘दयावान’ में माधुरी दीक्षित और विनोद खन्ना के बीच बेहद बोल्ड सीन फिल्माया गया था. लोगों को लगा था कि माधुरी ऐसे सीन के लिए राजी नहीं होंगी.

लेकिन माधुरी ने बिना हिचकिचाए अपने से 20 साल बड़े विनोद खन्ना के साथ सीन बोल्ड सीन शूट किया. लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो इस सीन को दर्शक पचा नहीं पाएं. सीन इतना बोल्ड बन चुका था कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बोल्ड सीन्स देने में परेशानी होती है, तो उन्होंने कहा कि ‘धक-धक’ बस सेट पर हो गया. हम डांस करते गए और वो गाना बनता गया, लेकिन मुझे ‘दयावान’ का किसिंग सीन करने का अफसोस है. दरअसल, आप जब नए होते हैं, तो आप डायरेक्टर को नहीं कह सकते कि आप यह रोल नहीं करना चाहते. बाद मैं मुझे एहसास हुआ कि आप मना भी कर सकते हैं. वैसे खबरें ये भी थीं कि माधुरी ने मेकर्स से सीन को फिल्म से हटाने के लिए कहा था. फिरोज खान इस पर राजी नहीं हुए. इस हॉट सीन की वजह से माधुरी को आलोचनाओं का शिकार भी होना पड़ा था.

कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से आरोप लगाया गया कि विनोद खन्ना इंटीमेट सीन करते हुए बहक गए थे. उन्होंने 1987 में ‘इंसाफ’ फिल्म से वापसी की. 4-5 साल तक हीरो बनने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे चरित्र भूमिकाओं की ओर रुख किया. वैसे कहा जाता है कि अगर विनोद खन्ना ओशो के आश्रम न जाते तो आने वाले वक्त में वह अमिताभ बच्चन के स्टारडम को फीका कर देते.

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