हिमाचल : संस्कृत भाषा के प्रचार के लिए सुंदरनगर में हिमाचल संस्कृत विकास संगठन का गठन हुआ

सुंदरनगर : मंगलवार को सुंदरनगर में हिमाचल प्रदेश संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. मस्तराम की अध्यक्षता में हिमाचल संस्कृत विकास संगठन का गठन किया गया। इसमें आचार्य अक्षय शर्मा को प्रदेशाध्यक्ष मनोनित किया गया। जानकारी देते हुए अक्षय शर्मा ने बताया कि संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए हिमाचल संस्कृत विकास संगठन का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए 5 से 7 विश्वविद्यालय खोले जा सकते हैं, तो हिंदोस्तान और हिमाचल में क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि आज विश्व की सबसे प्राचीनतम संस्कृत भाषा के संरक्षण की आवश्यता है, ताकि इसके अस्तित्व को भविष्य में बचाया जा सके। अक्षय शर्मा ने कहा कि शीघ्र हर एक मसौदा तैयार कर हिमाचल प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा। इसमें प्रदेश की वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में संस्कृत विषय को अनिवार्य विषय के रूप में करने, संस्कृत के छात्रों के परीक्षा परिणामों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित समय पर घोषित करने, विश्वविद्याालय में संस्कृत की एमए, एमफिल और पीएचडी की सीटें बढ़ाने तथा प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृत विश्वविद्यालय का भी प्रावधान करने की मुख्य मांगें होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार से मांग करते हुए कहा कि तत्काल विवि में आचार्य की कक्षाओं को नियमित रूप से चलाया जाए, ताकि छात्रों को आचार्य करने के लिए बाहरी राज्योंं में न जाना पड़े। हिमाचल प्रदेश संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. मस्तराम इस संगठन के संरक्षक होंगे। वहीं इस अवसर पर संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केशवानंद कौशल भी उपस्थित रहे।
अरुण कुमार को सचिव, रोहित कुमार को सहसचिव, दीपक कुमार, पंकज, विजय, दीपिका कुमारी, मीनाक्षी देवी, रेशम कुमार, अनिल कुमार, दिनेश, धीरज, मनोज, रितू, निखिल, निशांत शर्मा, संजीव, आकाश, मनोज, मोहित, बोधराज, कुलदीप, रवि शर्मा, सुधीर, संदीप आदि को प्रदेश सदस्य बनाया गया।
प्रदेश को पांचों राजकीय संस्कृत कॉलेजों सहित निजी कॉलेजों में अलग-अलग कार्यकारिणी का गठन असगामी दिनों में किया जाएगा। इसी कड़ी में मंगलवार को संस्कृत कॉलेज पंजगाईं, संस्कृत कॉलेज चकमोह में कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया। प्रदेश संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. मस्तराम की अध्यक्षता में हिमाचल संस्कृत विकास संगठन का गठन किया गया। इसमें आचार्य अक्षय शर्मा को प्रदेशाध्यक्ष मनोनित किया गया। जानकारी देते हुए अक्षय शर्मा ने बताया कि संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए हिमाचल संस्कृत विकास संगठन का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए 5 से 7 विश्वविद्यालय खोले जा सकते हैं, तो हिंदोस्तान और हिमाचल में क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि आज विश्व की सबसे प्राचीनतम संस्कृत भाषा के संरक्षण की आवश्यता है, ताकि इसके अस्तित्व को भविष्य में बचाया जा सके। अक्षय शर्मा ने कहा कि शीघ्र हर एक मसौदा तैयार कर हिमाचल प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा। इसमें प्रदेश की वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में संस्कृत विषय को अनिवार्य विषय के रूप में करने, संस्कृत के छात्रों के परीक्षा परिणामों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित समय पर घोषित करने, विश्वविद्याालय में संस्कृत की एमए, एमफिल और पीएचडी की सीटें बढ़ाने तथा प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृत विश्वविद्यालय का भी प्रावधान करने की मुख्य मांगें होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार से मांग करते हुए कहा कि तत्काल विवि में आचार्य की कक्षाओं को नियमित रूप से चलाया जाए, ताकि छात्रों को आचार्य करने के लिए बाहरी राज्योंं में न जाना पड़े। हिमाचल प्रदेश संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. मस्तराम इस संगठन के संरक्षक होंगे। वहीं इस अवसर पर संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केशवानंद कौशल भी उपस्थित रहे।
अरुण कुमार को सचिव, रोहित कुमार को सहसचिव, दीपक कुमार, पंकज, विजय, दीपिका कुमारी, मीनाक्षी देवी, रेशम कुमार, अनिल कुमार, दिनेश, धीरज, मनोज, रितू, निखिल, निशांत शर्मा, संजीव, आकाश, मनोज, मोहित, बोधराज, कुलदीप, रवि शर्मा, सुधीर, संदीप आदि को प्रदेश सदस्य बनाया गया।
प्रदेश को पांचों राजकीय संस्कृत कॉलेजों सहित निजी कॉलेजों में अलग-अलग कार्यकारिणी का गठन असगामी दिनों में किया जाएगा। इसी कड़ी में मंगलवार को संस्कृत कॉलेज पंजगाईं, संस्कृत कॉलेज चकमोह में कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया।

Leave A Reply