(न्यूज़लाइवनाउ-Iran) ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव का असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर गहराई से पड़ रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को साफ करने में करीब छह महीने का समय लग सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है।
पेंटागन ने अमेरिकी सांसदों को एक गोपनीय बैठक में बताया कि भले ही युद्धविराम हो जाए, लेकिन इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर सामान्य स्थिति जल्दी बहाल नहीं होगी। सुरंगों की मौजूदगी के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित रहेगी और तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित होती रहेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इन बारूदी सुरंगों को हटाने का काम तभी शुरू हो सकता है जब ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो जाए। इसका मतलब है कि आर्थिक असर लंबे समय तक जारी रह सकता है और ईंधन की कीमतों में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है।
ऊर्जा कीमतों पर पड़ेगा बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के चलते दुनिया भर में तेल और गैस के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं। अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतें बढ़ी रह सकती हैं, खासकर राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से इस मार्ग पर समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ईरान ने कई जगहों पर जहाजों के लिए प्रतिबंध लगाए हैं और कुछ विशेष रास्तों से ही सीमित आवाजाही की अनुमति दी जा रही है।
दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस का परिवहन होता है, इसलिए यहां रुकावट आने से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है।
इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि एशिया, यूरोप और अमेरिका समेत कई क्षेत्रों में महंगाई और सप्लाई की समस्या बढ़ सकती है।
यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसकी रणनीतिक अहमियत इतनी ज्यादा है कि इसके बाधित होते ही वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच जाती है।
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