धर्म ग्रंथों के अनुसार, चैत्र नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप करने से सभी सुखों की प्राप्ति संभव है। ये मंत्र बहुत ही चमत्कारी हैं, अगर विधि-विधान से इनका जाप किया जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। (दुर्गा सप्तशती के मंत्र बहुत ही शीघ्र असर दिखाते हैं, यदि आप मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जाप करवाएं, अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं।) मंत्र जाप की विधि इस प्रकार है-जाप विधि
सुंदर पत्नी के लिए मंत्र
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्। ॥
गरीबी मिटाने के लिए
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता। ॥
रक्षा के लिए
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च। ॥
स्वर्ग और मुक्ति के लिए
स्वर्गापर्वदे देवि नारायणि नमोस्तु ते।॥
मोक्ष प्राप्ति के लिए
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्
त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतु:। ॥
सपने में सिद्धि-असिद्धि जानने का मंत्र
मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।॥
सामूहिक कल्याण के लिए मंत्र
निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां
भकत्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न: । ॥
भय नाश के लिए
ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय
नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु। ॥
रोग नाश के लिए
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।॥
बाधा शांति के लिए
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वरिविनासनम्।॥
विपत्ति नाश के लिए मंत्र
प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं
त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।॥