रूस-भारत के बीच अटके है S – 400 के अलावा कई प्रोजेक्‍ट

इसके बावजूद इस पर अब तक भी पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की चेतावनी को भी भारत पूरी तरह से दरकिनार नहीं कर सकता है

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : रूस से S-400 मिसाइल सिस्‍टम की खरीद को लेकर आंख दिखा रहे अमेरिका ने अब साफ कर दिया है कि यदि भारत इसमें आगे बढ़ा तो प्रतिबंध से नहीं बच सकेगा। इसको लेकर अमेरिका ने चीन को भी सख्‍त संदेश दिया है। गौरतलब है कि इस मिसाइल सिस्‍टम को लेकर दोनों देशों के बीच काफी समय से बातचीत चल रही है। पिछले दिनों निर्मला सीतारमण की विदेश यात्रा के दौरान भी इस सौदे को लेकर बात हुई थी। इसके बावजूद इस पर अब तक भी पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की चेतावनी को भी भारत पूरी तरह से दरकिनार नहीं कर सकता है।ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि हालिया कुछ वर्षों में भारत और अ‍मेरिका के बीच कुछ विवादित मुद्दों के बावजूद संबंध बेहद मजबूत हुए हैं। पिछले दिनों अमेरिका ने भारत को जिस तर्ज पर अहम दर्जा दिया है यह उसका जीता जागता सुबूत भी है। ऐसे में भारत न तो रूस से सौदा रद कर सकता है और न ही वह अमेरिका से बिगाड़ना चाहेगा। ऐसे में भारत को कहीं न कहीं बीच का रास्‍ता जरूर तलाश करना होगा। यह रास्‍ता मुमकिन है कि आने वाले दिनों में तलाश भी कर लिया जाए।दरअसल, अगले माह रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह यहां पर 5 अक्‍टूबर से शुरू होने वाले 19वें भारत-रूस सम्‍मेलन में शिरकत करेंगे। इसी दौरान उम्‍मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच इस सौदे को लेकर खास बातचीत भी होगी और अमेरिका का हल भी निकाला जाएगा। इससे पहले 21 मई को रूस और भारत के राष्‍ट्राध्‍यक्षों की मुलाकात रूस के शहर सोची में हुई थी। दरअसल, भारत के लिए एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम काफी अहम है। अहम इसलिए भी है क्‍योंकि भारत लगातार अपनी सेना के सभी अंगों को अत्‍याधुनिक बनाने का काम कर रहा है। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से सेना के अंगों को अत्‍याधुनिक तरीके से सुस्‍सजित करने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इसका ही एक हिस्‍सा फ्रांस से राफेल विमान और रूस से एस-400 की डील है। निश्चिततौर पर इन दोनों से ही भारत की सुरक्षा मजबूत होगी। यहां पर ये भी जान लेना जरूरी होगा कि एस-400 मिसाइल का पूरा सौदा करीब 40 हजार करोड़ का है।वर्ष 2017 में दोनों देशों के बीच सम्‍मेलन सेंट पीट्सबर्ग में हुआ था। जहां तक पुतिन के भारत आने की बात है तो वह वर्ष 2000 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, आ चुके हैं। इस दौरान दोनों देशों ने साझेदारी के कई दूसरे आयामों पर भी चर्चा की थी। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच सिर्फ एस-400 का ही सौदा नहीं है बल्कि कई दूसरे समझौत भी पाइपलाइन में हैं। इसमें रूसी असाल्‍ट राइफल्‍स एके 103 का लाइसेंस के तहत प्रोडेक्‍शन, रोस्‍टेक हेलीकॉप्‍टर और हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड Ka-226 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्‍टर का निर्माण, चार तलवार क्‍लास फ्राइगेट और दो आईएल 78 ट्रांसपोर्ट विमान समेत अर्ली वार्निंग सिस्‍टम भी शामिल है।इतना ही नहीं नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर भी इसी पाइपलाइन का हिस्‍सा है। दरअसल यह कॉरिडोर मुंबई से यूरोप तक कम समय में सामान की डिलीवरी के लिए काफी फायदेमंद होगा। यह रास्‍ता इरान, अरमेनिया, अजरबेजान से होते हुए रूस पहुंचेगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस गगनयान की चर्चा बीते दिनों लालकिले से की थी, उसमें भी रूस अपना पूरा योगदान दे सकता है। माना जा रहा है कि गगनयान के महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट के लिए रूस ही भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देगा। इस बात का जिक्र इसरो की तरफ से भी किया जा चुका है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि रूस के साथ आगे बढ़ने के लिए भारत के पास वाजिब वजह तो है लेकिन अमेरिका को दरकिनार कर इस पर आगे बढ़ना शायद सही नहीं होगा। हालांकि इस बात में भी कोई शक नहीं है कि मौजूदा समय में अमेरिका कई मुद्दों पर खुद भी अलग-थलग पड़ चुका है।आपको बता दें कि सीएएटीएसए के तहत ईरान, उत्तर कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाया गया है। भारत करीब 4.5 अरब डॉलर (करीब 310 अरब रुपये) में रूस से पांच एस-400 टिंफ मिसाइल खरीदने की योजना बना रहा है। ऐसे में भारत के खिलाफ भी प्रतिबंध संभावित है। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि सीएएटीएसए लागू होने के बाद दिसंबर 2017 में चीन 10 सुखोई लड़ाकू विमान खास तौर से एसयू-25 लिया था। इसके अलावा उसने इस वर्ष जनवरी में एस-400 भी लिए। इसे कभी एसए-21 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली कहा जाता था।

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