मध्य-पूर्व में बढ़ता युद्ध: इज़राइल का तेहरान पर बड़ा हमला, नेतन्याहू बोले – अभी और चौंकाने वाले कदम बाकी
(न्यूज़लाइवनाउ-Israel) मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इज़राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान में तेल भंडारण से जुड़े कई ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए, जिससे वहां भीषण आग लग गई और शहर के आसमान में धुएँ के बड़े-बड़े गुबार दिखाई देने लगे। इस हमले के बाद क्षेत्र में युद्ध और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह सैन्य अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और आगे भी कई “अप्रत्याशित कार्रवाइयाँ” देखने को मिल सकती हैं। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में इज़राइल ईरान के खिलाफ और कड़े कदम उठा सकता है।
तेल भंडारण केंद्रों को बनाया गया निशाना
रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइली लड़ाकू विमानों ने तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में स्थित ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। हमले के बाद कई जगहों पर बड़े विस्फोट हुए और आग की लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं। इस घटना ने शहर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। यह पहली बार है जब इस संघर्ष के दौरान ईरान के किसी औद्योगिक या ऊर्जा से जुड़े नागरिक ढांचे को इतना बड़ा नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ढांचे पर हमला करने से ईरान की आर्थिक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
इस संघर्ष में अमेरिका भी सक्रिय रूप से शामिल बताया जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है।
ईरान ने इन हमलों का जवाब मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान समर्थित समूहों ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ मध्य-पूर्व के कई देशों में भी हमले किए हैं। इस संघर्ष का असर कुवैत, इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों तक फैलता दिखाई दे रहा है।
भारी जनहानि और बढ़ता संकट
इस पूरे संघर्ष में अब तक हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है और कई देशों में अस्थिरता बढ़ गई है। बड़ी संख्या में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। लगातार बढ़ते हमलों के कारण पूरे मध्य-पूर्व में मानवीय संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
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