SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र का रुख साफ, सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार- आर्थिक स्थिति को आधार नहीं बनाया जा सकता

(न्यूज़लाइवनाउ-New Delhi) अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने आरक्षण के दायरे से आर्थिक रूप से संपन्न SC/ST सदस्यों को बाहर करने के लिए ‘क्रीमी लेयर’ व्यवस्था लागू करने का विरोध किया है। केंद्र का कहना है कि इन समुदायों को मिलने वाला आरक्षण केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चली आ रही सामाजिक और ऐतिहासिक असमानता प्रमुख आधार है।

केंद्र ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि SC और ST समुदायों के साथ होने वाला भेदभाव सिर्फ उनकी आय या आर्थिक हैसियत से तय नहीं किया जा सकता। सरकार के मुताबिक, किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बावजूद सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक वंचना का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

सरकार ने SC/ST आरक्षण पर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू करने के विचार को OBC आरक्षण से अलग बताया। OBC वर्ग में अपेक्षाकृत संपन्न तबके को आरक्षण से बाहर रखने के लिए क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू है, लेकिन केंद्र का तर्क है कि SC और ST समुदायों की सामाजिक पृष्ठभूमि अलग है। इसलिए दोनों वर्गों के लिए एक जैसा मापदंड अपनाना उचित नहीं होगा।

केंद्र ने यह भी दलील दी कि आरक्षण का उद्देश्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता देना नहीं है। SC और ST समुदायों को आरक्षण देने का मकसद सामाजिक रूप से जड़ जमाए भेदभाव और ऐतिहासिक पिछड़ेपन की भरपाई करना तथा उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में समान अवसर उपलब्ध कराना है।

सरकार का मानना है कि यदि आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके SC/ST लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर कर दिया गया, तो इससे सकारात्मक कार्रवाई की संवैधानिक भावना प्रभावित हो सकती है। केंद्र ने इसी आधार पर क्रीमी लेयर को SC/ST आरक्षण से जोड़ने की मांग का विरोध किया है।

आय आधारित उप-कोटे का भी विरोध

इसी मामले से जुड़े व्यापक आरक्षण विवाद में केंद्र ने आरक्षित वर्गों के भीतर केवल आय के आधार पर अलग उप-कोटा बनाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। सरकार का कहना है कि SC, ST और OBC/SEBC के लिए आरक्षण का मूल आधार ऐतिहासिक तथा सामाजिक पिछड़ापन है, न कि केवल आर्थिक स्थिति।

केंद्र के इस रुख के बाद SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सरकार की दलीलों और अदालत के रुख पर सभी की नजर रहेगी।

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