(न्यूज़लाइवनाउ-Nepal) नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद बाढ़ का पानी बेहद तेजी से निचले इलाकों में फैल गया। इस प्राकृतिक आपदा के बाद कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और अन्य ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सैलाब की भयावहता साफ दिखाई दे रही है।
बाढ़ की चपेट में कई इलाके
रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ का असर रसुवा के साथ धादिंग और नुवाकोट जैसे इलाकों तक भी पहुंचा है। तेज बहाव ने नदी किनारे मौजूद बस्तियों और निर्माणाधीन तथा संचालित जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती आकलन के मुताबिक कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे नेपाल के बिजली ढांचे पर भी असर पड़ा है।
105 भारतीय पर्यटकों के लापता होने की खबर
नेपाल पर्यटन बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक कुल 384 यात्री लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय पर्यटक भी हैं। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों की बताई जा रही है।
इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड समेत कई देशों के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों में 37 एनआरआई के लापता होने का भी उल्लेख है।
सामने आए तबाही के डरावने वीडियो
बाढ़ के बाद सामने आए वीडियो में पहाड़ी इलाकों से मटमैले पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आता दिखाई दे रहा है। कुछ दृश्यों में पानी अपने रास्ते में आने वाली संरचनाओं और वाहनों को प्रभावित करता नजर आता है। तिब्बत के जिरोंग इलाके से सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भी अचानक आए सैलाब की भयावह तस्वीरें रिकॉर्ड हुई हैं।
इन दृश्यों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पानी की रफ्तार कितनी तेज थी और लोगों को संभलने तक का पर्याप्त मौका नहीं मिला।
राहत और बचाव अभियान तेज
आपदा के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें बचाव अभियान में जुट गई हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्र में सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों के सामने कई मुश्किलें बनी हुई हैं।
भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना के बाद भारत की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों के परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था की गई है।
आखिर क्यों आई इतनी भयावह बाढ़?
बाढ़ की सटीक वजह की जांच अभी जारी है। शुरुआती आशंका है कि तिब्बत की ओर किसी बर्फीले या चट्टानी भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह अचानक बाधित हुआ और उसके बाद बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया। विशेषज्ञों और अधिकारियों की ओर से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनदीय झील के अचानक फटने जैसी संभावनाओं की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाना और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बचाव अभियान लगातार जारी है।
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