हिमाचल के कुछ मीडिया हाऊस ख़बर की पड़ताल किये बिना छाप गए महिला का झूठ: हरीश
पति-पत्नी के झगड़े में पूर्व परिवार को लपेटने की साजिश।
(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) रामपुर: शनिवार को कामरु पंचायत से संबंध रखने वाली एक महिला ‘हीरा भगती’ ने अपने को अभागी दिखाते हुए एक प्रेस वार्ता की और क्योंकि महिला के आरोप सनसनीखेज़ थे, तो प्रदेश के कुछ गैरज़िम्मेदार मीडिया हाऊस ने खबर को हाथों हाथ लिया। तुरंत न्यूज़ पोर्टल और उनके फेसबुक पेज़ पर ख़बर तैरने लगी। कुछ स्थानीय पत्रकारों ने तो इसे क्षेत्र में महिला उत्पीड़न का एक बड़ा मामला तक करार दे डाला। ख़बर में लिखा गया कि पुलिस प्रशासन से उक्त महिला को सहयोग नहीं मिला। ये भी लिखा गया कि अभागी महिला ने प्रदेश उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। खबरों के मुताबिक एक हलफनामे में कहा गया कि 2011 में उक्त महिला की शादी ‘हरीश कुमार’ जिला कुल्लू से हुई थी। जिसके बाद दो बेटियां भी हुई। महिला ने बताया कि बार-बार कहने के बाद भी पति द्वारा बच्चो का नाम अपने पंचायत में पंजीकरण न करने तथा ससुराल न ले जाने को लेकर विवाद होता रहा। इस दौरान पति हरीश कुमार मेरे साथ शारीरिक, मानसिक व आर्थिक शोषण करता रहा। महिला ने यह भी बताया कि पति द्वारा किसी तरह का सहयोग न मिलने पर जब वह स्वयं कुल्लू स्थित अपने ससुराल गई तो वहां पर स्वयं पति, जेठ सहित सास द्वारा मुझे जाति सूचक शब्दों का हवाला देने के साथ-साथ पति द्वारा मारपीट कर मुझे अपमानित किया गया। महिला ने बताया कि पति, जेठ सहित सास द्वारा घरेलू हिंसा के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक व जाति सूचक शब्दो के प्रयोग को लेकर एसपी सहित महिला पुलिस थाना कुल्लू में 6-12-2017 को शिकायत दर्ज करवाई गई। इस दौरान आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई होने के बजाय मुझे अज्ञात फोन कॉल से केस को वापिस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। यहां तक कि अपनी ऊंची राजनीतिक पहुँच का हवाला देकर डराया धमकाया जा रहा है। पीड़िता ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखने के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस मामले की जांच कर न्याय दिलाया जाए। खबर के अनुसार जब ‘डीएसपी मनोज कुमार’ से मामले के बारे में बात की गई तो डीएसपी मनोज कुमार का कहना है कि ‘हीरा भगती के विरुद्ध जातिसूचक शब्द कहे जाने के आरोप व गवाह न पाए जाने पर प्रारम्भिक जांच में केस खारिज कर दिया गया है। जाँच में यह भी सामने आया है कि शादी के बाद हीरा भगती अपने पति के साथ ससुराल में नही रही। ऐसे में घरेलू हिंसा का मामला नही बनता है। पति पर (498 A) घरेलू उत्पीड़न की जाँच चल रही है।’
ये तो खबर का एक तरफ़ा पहलू है क्योंकि कथित जनसेवक मीडिया ने दूसरा पक्ष जानने की कोशिश नहीं की और पुलिस प्रशासन की व्यवस्था प्रणाली पर भी सवालिया निशान उठा लिए। लेकिन मामला इतना भी सीधा नहीं है उक्त महिला के पति ने कुछ मीडिया कर्मियों से संपर्क साध कर देर रात अपना पक्ष रखा। आरोपी हरीश कुमार का कहना है कि वो आज से लगभग 7 साल पहले अपना घर छोड़ कर उस उक्त लड़की के साथ विवाह कर घरजवाई के रूप में रामपुर क्षेत्र में ही लड़की के घर पर रहने लगा था। क्योंकि दोनों ने परिवार को बिना बताये ये विवाह किया था और कभी घर नहीं जाने की बात की थी इसी कारण इतने वर्षों वो घर से दूर रहे। लेकिन पहली संतान होने के बाद से ही उक्त महिला का आचरण और स्वभाव बदल गया। दोनों के बीच लगातार लड़ाई झगड़े होने लगे। तब हरीश ने महिला को तलाक़ देने की बात कही। इसी बात पर उक्त महिला ने कहा कि मैं तेरे परिवार को बर्वाद कर दूंगी। तुम लोग मुझे जानते नहीं हो? मैं उन सभी पर एससीएसटी एक्ट लगवा दूंगी। महिला आयोग जाऊंगी और इतना बदनाम कर दूंगी कि तुम्हारा खानदान भी याद रखेगा। मामला धीरे-धीरे इतना बिगड़ता गया कि हरीश और उसके पूर्व परिवार पर भी उक्त महिला ने कई पुलिस केस दर्ज़ करवा डाले। हरीश आगे कहते हैं कि महिला होने और दलित होने का अनुचित लाभ लेते हुए इसने मुझे व मेरे पूर्व परिवार को बहुत परेशान कर रखा है। जबकि मैंने अब इस महिला को तलाक़ का नोटिस भी थमा दिया है। हरीश का कहना है कि इस मामले में मेरी बच्चियों का कोई कसूर नहीं है लेकिन अब मैं उक्त महिला के साथ नहीं रहना चाहता और भारत का क़ानून मुझे ऐसी पत्नी से तलाक़ लेने की स्वतंत्रता देता है। मैं अब कोटला पंचायत का निवासी नहीं हूँ। मेरा नाम मोगरा पंचायत विकास खण्ड नारकंडा में दर्ज़ है और मैं वहीँ रहता भी हूँ तो ऐसे में मैं मेरी बच्चियों का नाम उक्त पंचायत में दर्ज़ करवाना चाहता हूँ। लेकिन मेरी पत्नी ऐसा नहीं होने दे रही और मीडिया, पुलिस प्रशासन के सामने झूठ बोल रही है। मेरी पत्नी कभी भी मेरे पूर्व परिवार के घर नहीं गई वो झूठ बोल रही है यदि गई है तो तारीख़ बता दे और किससे मिली क्योंकि वहां पूरे घर के चरों और सीसीटीवी कैमरा 24 घंटे लगे हुए हैं। साथ ही जिन अज्ञात नं से धमकी भरे फोन आ रहे हैं उनको कृपया पुलिस और मीडिया को दे कर जांच करवा ले, लेकिन झूठ बोलने से बाज़ आये। रही बात जान से मारने की! तो बस मुझे तलाक दे दे! मैं किसी को परेशान तक नहीं कर सकता, तो इस तरह के झूठे आरोप लगा कर, लोगों और मीडिया को गुमराह ना करे। हरीश ने आगे बताया कि आज मीडिया की जिम्मेवारी भी बहुत बढ़ गई है कुछ पत्रकार पत्रकारिता को गंभीरता से नहीं ले रहे। जबकि उनकी एक गलत खबर से मेरी जिंदगी बर्बाद हो सकती है। हरीश मीडिया से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि यदि कोई अपराधी दलित है या कोई अपराधी महिला है तो क्या हमारा समाज और न्यायालय उनका साथ देगा? मुझे मेरी बच्चियों की बहुत परवाह है लेकिन मेरी पत्नी के साथ अब मैं नहीं निभा सकता। मेरे पूर्व परिवार को और मुझे पुलिस पहले ही बहुत तंग कर चुकी है लेकिन इसी आस में कि क़ानून सबके लिए बराबर है और मैं पुरुष हूँ मुझे भी न्याय मिलेगा, इसी इन्तजार में लड़ाई लड़ रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि अब वो आरोप लगाने के लिए हर हथकंडा अपनाएगी लेकिन मुझे विश्वास है कि अंतत: सत्य की ही विजय होती है।