क्रिकेट में भी था जेटली का बड़ा योगदान, कई स्टार क्रिकेटर उनके कार्यकाल में उभरे।
सच्चाई यह है कि राजनेता होने के बावजूद वह क्रिकेट को दीवानगी की हद तक चाहते थे। वीरेंद्र सहवाग, आशीष नेहरा, गौतम गंभीर, विराट कोहली, इशांत शर्मा, शिखर धवन जैसे क्रिकेटरों को स्थापित करने में जेटली का बहुत बड़ा हाथ रहा।
(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : भारतीय क्रिकेट को भी अरुण जेटली की ऊर्जा असीम प्रतिभा का साथ मिला। अरुण जेटली बीसीसीआई के अध्यक्ष कभी नहीं रहे, लेकिन उन्हें क्रिकेट की दुनिया में इससे भी बड़ा स्थान हासिल था। क्रिकेट का मैदान हो या फिर इस खेल की राजनीति, क्रिकेट प्रशासकों को संकट की घड़ी में अरुण जेटली ही याद आते थे। सच्चाई यह है कि राजनेता होने के बावजूद वह क्रिकेट को दीवानगी की हद तक चाहते थे। वीरेंद्र सहवाग, आशीष नेहरा, गौतम गंभीर, विराट कोहली, इशांत शर्मा, शिखर धवन जैसे क्रिकेटरों को स्थापित करने में जेटली का बहुत बड़ा हाथ रहा। दिल्ली के इन नामी क्रिकेटरों ने उन्हीं के डीडीसीए अध्यक्ष, बीसीसीआई उपाध्यक्ष रहते क्रिकेट की बुलंदियों को छुआ। सही मायनों में ये स्टार क्रिकेटर उन्हीं के कार्यकाल में ही उभरे। डीडीसीए के चयनकर्ता और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के पुत्र सिद्धार्थ वर्मा की मानें तो क्रिकेटरों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। पूर्व टेस्ट क्रिकेटर आशीष नेहरा को गंभीर चोट लगी थी। यह अरुण जेटली थे जिन्होंने नेहरा का इलाज कराने का बीड़ा उठाया। नेहरा का आपरेशन हुआ और उसके बाद उन्होंने भारतीय टीम में वापसी की। इसी तरह तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान के आपरेशन में उन्होंने खुद रुचि ली। सहवाग, गंभीर, शिखर, विराट, इशांत, आशीष का करियर उनके कार्यकाल के दौरान परवान चढ़ा। वह बीसीसीआई में उनके अच्छे प्रदर्शन की खुद पैरवी करते थे। वर्मा के मुताबिक क्रिकेट की वह हर खबर रखते थे। एक समय वह आया जब वीरेंद्र सहवाग का डीडीसीए से काफी मनमुटाव बढ़ गया था। उन्होंने दिल्ली छोडने का मन बना लिया। वह हरियाणा की ओर से खेलने की तैयारी में लग गए। सारी औपचारिकताएं पूरी हो गई थीं। जेटली को यह बात पता लगी। उन्होंने खुद सहवाग से बात की और उन्होंने हरियाणा जाने से रोका। सहवाग ने भी जेटली का मान रखा और दिल्ली को नहीं छोड़ा। बीसीसीआई ने जब अपने पूर्व क्रिकेटरों की पेंशन योजना शुुरू की तो अरुण जेटली को लगा कि डीडीसीए में इसे शुरू करना चाहिए। उन्होंने डीडीसीए में क्रिकेटरों की पेंशन योजना को शुरू कराया। यही नहीं वह सख्त फैसले भी लेते थे। वर्मा खुलासा करते हैं कि एक बार उन्हें पता लगा कि डीडीसीए चयन समिति मनमाने ढंग से रणजी टीम का चयन किया है। उन्होंने डीडीसीए के इतिहास में पहली बार चयन समिति को भंग कर दिया। एक बार तीन ग्रुपों की ओर से टीम चयनित कर ली गई। उन्होंने एडहॉक कमेटी खड़ी कर खुद चयन की जिम्मेदारी संभाली। वर्मा के मुुताबिक डीडीसीए अध्यक्ष पद छोडने के बाद और हाल-फिलहाल तक वह रणजी मैच देखने कोटला पहुंच जाते थे। यही नहीं दिल्ली की टीम एक बार जयपुर में रणजी ट्राफी मैच खेलने गई थी। टीम के मैनेजर बिशन सिंह बेदी थे। उन्हें फोन आया कि जिस होटल में टीम को ठहराया गया है वह स्तरीय नहीं है। उन्होंने तत्काल टीम को अच्छे होटल में रुकने को कहा। उन्हीं के कार्यकाल में फिरोजशाह कोटला का जीर्णोद्धार कराया गया। भारतीय प्रजातंत्र और कानून को अपना विलक्षण योगदान देने के साथ जेटली ने इस तरह भारतीय क्रिकेट को भी बड़ा सहयोग दिया।