राज्यसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश की 10 में से 9 सीटें जीतकर भाजपा के राज्यसभा में हुए 73 सांसद

चुनाव के बाद भाजपा का आंकड़ा 72 हो सकता है। यानी 44 + 28 (17 कैंडिडेट निर्विरोध चुने गए हैं। वहीं, उत्तरप्रदेश से 8, कर्नाटक से 1, झारखंड से 1 और छत्तीसगढ़ से 1 सीट जीतना तय है।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ): 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी अपने 38 साल के इतिहास में पहली बार संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में 70 का आंकड़ा छू सकती है। बता दें कि देश के 16 राज्यों के 58 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल अप्रैल-मई में खत्म हो रहा है। 10 राज्यों से 33 सांसद निर्विरोध चुने गए हैं। बाकी 6 राज्यों की 25 सीटों और केरल की एक सीट के उपचुनाव के लिए मतदान चल रहा है। सबसे रोचक मुकाबला तो उत्तर प्रदेश में है। यहां 10 सांसद चुने जाने हैं। 9 पर तो तस्वीर करीब-करीब साफ है लेकिन एक सीट को लेकर रस्साकशी जारी है। इस बीच, बसपा विधायक अनिल सिंह ने न्यूज एजेंसी से कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार को वोट दिया है।
– राज्यसभा की 58 सीटों में से 33 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें बीजेपी के 17, कांग्रेस के 4 और अन्य दलों में बीजेडी 3, आरजेडी 2 , टीडीपी 2, जेडीयू 2, शिवसेना 1, एनसीपी 1 और वाईएसआरसी 1 का कैंडिडेट शामिल है।
– सात केंद्रीय मंत्री निर्विरोध चुने गए। इनमें रविशंकर प्रसाद (बिहार), धर्मेंद्र प्रधान और थावरचंद गहलोत (मध्यप्रदेश), जेपी नड्डा (हिमाचल), प्रकाश जावड़ेकर (महाराष्ट्र), मनसुखभाई मांडविया और पुरुषोत्तम रूपाला (गुजरात) शामिल हैं।
– 23 मार्च को केरल की एक सीट पर उपचुनाव भी होगा। यहां से जेडीयू सांसद वीरेंद्र कुमार ने इस्तीफा दे दिया था।

बीजेपी के लिए फायदे का सौदा
– भाजपा के राज्यसभा में फिलहाल 58 सांसद हैं। अप्रैल में 14 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। इन्हें हटा दें तो उसके सिर्फ 44 सांसद बचते हैं।
– चुनाव के बाद भाजपा का आंकड़ा 72 हो सकता है। यानी 44 + 28 (17 कैंडिडेट निर्विरोध चुने गए हैं। वहीं, उत्तरप्रदेश से 8, कर्नाटक से 1, झारखंड से 1 और छत्तीसगढ़ से 1 सीट जीतना तय है।

लेकिन, यूपी पर नजरें क्यों?
– उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा में से एक सीट का चुनाव दिलचस्प हो गया है। यूपी से बीजेपी के 8 और सपा का एक कैंडिडेट राज्यसभा जाना तय है। बाकी बची एक सीट के लिए भाजपा के 9वें उम्मीदवार अनिल अग्रवाल और बसपा के इकलौते उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर के बीच कड़ी टक्कर है। बीजेपी कैंडिडेट को हराने के लिए सपा-बसपा साथ आ गई हैं। लेकिन, दोनों पार्टियों को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है।

भाजपा को 3 निर्दलीय विधायकों का साथ
– कुल 10 सीट पर चुनाव हैं। उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी पार्टी के पास 37 विधायक होने जरूरी हैं। बीजेपी अलायंस के पास 324 सीट हैं। 8 सदस्यों को राज्यसभा पहुंचाने के बाद 28 विधायक बचते हैं। ऐसे में एक और सदस्य को अपर हाउस भेजने के लिए 9 विधायक का समर्थन चाहिए।
– सपा को नरेश अग्रवाल और उनके विधायक बेटे नितिन के भाजपा में शामिल होने से क्राॅस वोटिंग का डर है। निषाद पार्टी के विधायक विजय मिश्रा, निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी भी भाजपा के साथ हैं। भाजपा को 9वीं सीट जीतने के लिए 6 विधायक चाहिए।
बहुजन समाज पार्टी को क्या डर?
– बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पास 19 विधायक हैं। पार्टी ने भीमराव अंबेडकर को मैदान में उतारा है। जीत के लिए 37 विधायकों का समर्थन चाहिए। उधर, सपा-बसपा का समर्थन कर रही है। सपा के पास 47 विधायक हैं। जया बच्चन को अपर हाउस में भेजने के लिए उसे 37 विधायक की जरूरत है। इसके बाद पार्टी के पास 10 विधायक बचते हैं। नरेश अग्रवाल और उनके विधायक बेटे नितिन अग्रवाल बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इससे एक वोट कम हो गया है।
– बीएसपी के मुख्तार अंसारी और हरिओम यादव जेल में हैं। हाईकोर्ट ने उनके राज्यसभा चुनाव में वोट डालने पर बैन लगा दिया है।
– अब ये स्थिति बन रही है- अंबेडकर को राज्यसभा भेजने के लिए बीएसपी के 17 + सपा के 9+ कांग्रेस के 7+ राष्ट्रीय लोकदल के 1 वोट के सहारे है। इस तरह टोटल 34 विधायक हो रहे हैं। जीत के लिए तीन विधायकों की और जरूरत होगी।

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