रिपोर्ट : अमेरिका को जवाब देने के लिए ईरान ने सऊदी अरब पर हमले की साजिश रची थी।
हमले की जिम्मेदारी यमन के हूती विद्रोहियों ने ली थी, लेकिन सऊदी ने इसके पीछे ईरान का हाथ बताया था।
(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : ईरान सऊदी अरब के तेल संयंत्रों में हमलो को लेकर विवादों में है। सऊदी अरब के दो तेल संयंत्र पर सितंबर में ड्रोन्स और मिसाइलों के जरिए हमला हुआ था। इसके चलते करीब एक हफ्ते तक सऊदी का तेल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। हमले की जिम्मेदारी यमन के हूती विद्रोहियों ने ली थी, लेकिन सऊदी ने इसके पीछे ईरान का हाथ बताया था। अब एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सऊदी पर हमले की साजिश ईरान में ही तैयार हुई थी। अरामको पर हमले से 4 महीने पहले ईरान के सैन्य अधिकारियों ने हमले की साजिश रचने के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बैठक में शामिल 4 लोगों के हवाले से यह खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारी परमाणु संधि से बाहर होने और तेहरान पर प्रतिबंध लागू करने के लिए अमेरिका को सबक सिखाना चाहते थे। बैठक में अधिकारियों के बीच इसी मुद्दे पर चर्चा हुई।मीटिंग में शामिल एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड के एक बड़े कमांडर ने यहां तक कह दिया कि यह समय है जब हम अपनी तलवारें निकालें और अमेरिका को सबक सिखाएं। कई अफसरों ने मीटिंग में अमेरिका के अहम ठिकानों को तबाह करने पर भी बात की। हालांकि, मीटिंग के अंत में अफसरों के बीच इस बात की सहमति बनी कि अमेरिका से सीधे हमले में उलझने के बजाय उसके किसी सहयोगी को सबक सिखाया जाए। यहीं पर अधिकारियों ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब के तेल संयंत्रों को निशाना बनाने पर सहमति जताई। यह पहली बार है जब ईरानी अधिकारियों की तरफ से 14 सितंबर के हमले पर कोई खुलासा हुआ है। बताया गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई ने सऊदी के खिलाफ ऑपरेशन पर मुहर लगाई थी। हालांकि, उन्होंने किसी नागरिक और अमेरिकी को निशाना बनाने से बचने की सलाह दी थी। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रवक्ता अलिरेजा मीरयूसफी ने रॉयटर्स के खुलासे को नकारा है। उन्होंने कहा कि सऊदी पर हुए हमले में ईरान का कोई हाथ नहीं है और न ही ऑपरेशन के लिए सैन्य अधिकारियों की कोई बैठक हुई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम लीडर की तरफ से ऑपरेशन की अनुमति का कोई सवाल ही नहीं उठता।