वायुसेना प्रमुख बोले – लाशें गिनना हमारा काम नहीं, निशाने पर ही गिरे बम

।26 फरवरी को बालाकोट में किए गए हवाई हमले के बाद पहली प्रेस कांफ्रेंस में वायु सेना प्रमुख ने कहा कि बमबारी के मिशन में सिर्फ यही देखा जाता है कि कितने टारगेट थे और उनमें से कितनों को निशाना बनाया जा सका।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : एक तरफ जहां पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मुहम्मद के ठिकानों पर हमले को लेकर राजनीति गर्म है और इसकी सफलता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने स्पष्ट किया है कि भारतीय वायु सेना की यह कार्रवाई ऑपरेशन का अंत नहीं है। उनका यह बयान बेहद छोटा जरूर है मगर इसका बड़ा संदेश साफ है कि आतंकवाद पर पाक की घेरेबंदी के लिए बालाकोट के बाद अगली बड़ी कार्रवाई का रास्ता बंद नहीं किया गया है।26 फरवरी को बालाकोट में किए गए हवाई हमले के बाद पहली प्रेस कांफ्रेंस में वायु सेना प्रमुख ने कहा कि बमबारी के मिशन में सिर्फ यही देखा जाता है कि कितने टारगेट थे और उनमें से कितनों को निशाना बनाया जा सका। वायु सेना ने टारगेट को हिट किया था।बम निशाने पर गिरे थे। कितनी मौतें हुई, यह हम नहीं बता सकते। मारे गए लोगों की गिनती करना वायु सेना का काम नहीं है। मरने वालों की संख्या लक्षित ठिकानों में मौजूद लोगों की संख्या पर निर्भर करती है, जिसका जवाब सरकार देगी।यह पूछने पर कि बम टारगेट के बजाय दूसरी जगह गिराए गए? एयर चीफ मार्शल धनोआ ने कहा कि हमारी रिपोर्ट इससे अलग है। यदि जंगल में बम गिराए गए होते तो फिर पाकिस्तान जवाब क्यों देता। अगर भारतीय वायु सेना टारगेट पर हिट नहीं करती तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बयान जारी करने की क्या जरूरत थी? उन्होंने कहा कि विदेश सचिव ने अपने बयान में तबाह किए गए आतंकी ठिकानों की स्पष्ट जानकारी दी है।पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ने में मिग-21 विमानों के उपयोग के सवाल पर वायु सेना प्रमुख ने कहा कि जब शत्रु हमला करता है तो जवाबी कार्रवाई में सभी विमानों का इस्तेमाल होता है। पाकिस्तान के खिलाफ जिन मिग-21 विमानों का उपयोग किया गया वे अपग्रेडेड विमान हैं। ये बेहतर हथियार सिस्टम, हवा से हवा में मार करने वाली बेहतर मिसाइलों और बेहतर रडार से लैस हैं। इनमें वह सब कुछ है जो 3.5 पीढ़ी के विमानों में होता है।

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