सुप्रीम कोर्ट ने आरे में पेड़ों की कटाई पर लिया संज्ञान।
वार सुबह ही लॉ स्टूडेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया था।
(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : देश की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स की ओर से पेड़ों को काटने के विरोध में लिखे गए लेटर को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई की बात कही है। कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन भी कर दिया है। रविवार सुबह ही लॉ स्टूडेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। पिछले कई दिनों से पर्यावरण प्रेमी और कार्यकर्ता मेट्रो शेड के लिए सैकड़ों की संख्या में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के वैकेशन ऑफिसर की ओर से इस बारे में सूचना दी गई है कि लॉ स्टूडेंट ऋषभ रंजन की ओर से लेटर लिखा गया था। इसमें बताया गया था कि मुंबई के आरे के जंगल में पेड़ काटे जा रहे हैं। इस बारे में लिखे गए लेटर को जनहित याचिका के तौर पर रजिस्टर्ड कर लिया गया है और सोमवार को सुबह 10 बजे सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में दाखिल अर्जी को खारिज कर दिया था। आरे में कुल 2700 पेड़ काटे जाने की योजना है, जिनमें से 1,500 पेड़ों को गिरा दिया गया है। पर्यावरण ऐक्टिविस्ट्स ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाई कोर्ट ने ऐक्टिविस्ट्स से चीफ जस्टिस का दरवाजा खटखटाने को कहा था। वहीं, मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भी शनिवार को आरे कॉलोनी में पेड़ों को काटने से पहले नई नोटिस जारी करने के पर्यावरण कार्यकर्ताओं के दावे को खारिज कर दिया। विरोध प्रदर्शन तेज होता गया तो पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि गिरफ्तार पर्यावरणविदों को रविवार को जमानत दे दी गई। पेड़ों की कटाई के खिलाफ प्रदर्शन करने के मामले में छह महिलाओं सहित 29 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। दरअसल मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है। आरे में करीब 2,500 पेड़ मेट्रो कॉरिडोर के रास्ते में आ रहे हैं। मेट्रो ने इन्हें काटना शुरू किया है, जिस पर स्थानीय लोगों समेत देश भर के पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। यही नहीं राज्य में सत्ताधारी बीजेपी के साथ गठबंधन में शामिल शिवसेना ने भी इसका विरोध किया है। शिवसेना की युवा शाखा के चीफ आदित्य ठाकरे ने भी इसका विरोध किया है।। पेड़ों के काटे जाने पर चिपको मूवमेंट जैसा आंदोलन शुरू करने की कोशिशें हुई थीं, लेकिन सरकार ने धारा 144 लागू कर इसे कुचल दिया।