सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट दिए पद्मावती की प्राइवेट स्क्रीनिंग करना अफसोसजनक : प्रसून जोशी

विवादों में फंसी फिल्म पद्मावती की प्राइवेट स्क्रीनिंग किए जाने से अब सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन भी खफा हो गया है। उसने कहा है कि मूवी मेकर्स की ओर से ऐसा करना ठीक नहीं है। बता दें कि शुक्रवार को कुछ जर्नलिस्ट्स के लिए इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई थी।

सेंसर बोर्ड की प्रॉसेस खत्म करने की कोशिश
– सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी ने न्यूज एजेंसी से कहा, “सेंसर बोर्ड ने अभी तक न तो फिल्म देखी और न ही इसे सर्टिफिकेट दिया। लेकिन इसके मेकर्स की ओर से प्राइवेट स्क्रीनिंग करना और नेशनल चैनल्स पर फिल्म का रिव्यू करना बेहद अफसोसजनक है।”
– उन्होंने कहा, “एक तरफ फिल्म रिलीज की प्रॉसेस में तेजी लाने के लिए सेंसर बोर्ड पर दबाव डाला जा रहा है, दूसरी तरफ बोर्ड की प्रॉसेस को ही खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
डॉक्यूमेंट कम्पलीट नहीं थे, इसलिए लौटाई फिल्म
– प्रसून जोशी ने कहा, “पद्मावती के रिव्यू की एप्लिकेशन इसी हफ्ते मिली थी। मेकर्स जानते हैं कि पेपर वर्क कम्पलीट नहीं है।
– उन्होंने कहा, “फिल्म के डॉक्यूमेंट्स में यह बात भी साफ नहीं है कि यह एक फि‍क्शन है या हिस्टोरिकल। पेपर्स अधूरे होने और फिल्म की कैटेगरी को ब्लैंक छोड़ने की वजह से ही सेंसर ने मूवी मेकर्स से ये दस्तावेज मुहैया कराने के लिए कहा है। हैरानी की बात है कि इसके बाद भी सेंसर बोर्ड पर फिल्म के सर्टिफिकेशन में देरी करने का आरोप लगाया जा रहा है।”

प्राइवेट और पब्लिक एक्जिबिशन में फर्क है
– सेंसर बोर्ड के ऑफिशियल्स ने न्यूज एजेंसी से कहा, “पद्मावती के मेकर्स ने इसकी इंडीविजुअल्स के लिए स्क्रीनिंग की। यह ठीक नहीं है। फिल्म के प्राइवेट और पब्लिक एक्जिबिशन में मामूली सा अंतर है। बगैर सर्टिफिकेट के यह करना गलत मिसाल है। सेंसर बोर्ड इससे खुश नहीं है।”
कोई नहीं कह सकता है प्राइवेट स्क्रीनिंग थी
– सेंसर बोर्ड के ऑफिशियल्स ने कहा, “पद्मावती देखने के बाद लोग जिस तरह अपने विचार दे रहे हैं, उससे कोई नहीं कह सकता कि यह एक प्राइवेट स्क्रीनिंग थी। ऐसा नहीं किया जाता।”
फिल्म पद्मावती को लेकर क्या आपत्ति है?
– राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच इंटीमेट सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। लिहाजा, फिल्म को रिलीज से पहले पार्टी के राजपूत प्रतिनिधियों को दिखाया जाना चाहिए।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
– राजस्थान में फिल्म शूटिंग के दौरान इसके विरोध की शुरुआत हुई थी। शूटिंग के वक्त राजपूत करणी सेना ने कई जगह प्रदर्शन किया था और पुतले फूंके थे। जयपुर में शूटिंग के दौरान कुछ लोगों ने संजय लीला भंसाली से बदसलूकी की थी, जिसके बाद कोल्हापुर में फिल्म का सेट लगाया तो यहां भी इसे जला दिया गया।
अब तक क्या हुआ?
– विरोध मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक तक पहुंच गया है।
– राजस्थान की राजपूत करणी सेना के अलावा राजघराने भी फिल्म के खिलाफ हैं। इनकी मांग है कि इसे रिलीज करने के पहले उन्हें दिखाई जाए।
– राजनाथ सिंह, उमा भारती, लालू प्रसाद यादव, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने बयान दिए कि लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।
– गुरुवार को राजपूतों ने चितौड़गढ़ का किला बंद रखकर प्रदर्शन किया था।
– करणी सेना के महिपाल मकराना ने कहा, “राजपूत कभी महिलाओं पर हाथ नहीं उठाते, लेकिन जरूरत पड़ी तो हम दीपिका पादुकोण का वही हाल करेंगे, जो लक्ष्मण ने सूर्पणखा का किया था।”
– संभल में प्रोटेस्टर्स ने पोस्टर लगाए गए। इनमें लिखा था कि संजय लीला भंसाली का सिर काटने वाले को 50 लाख इनाम।

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