93 साल के इतिहास में पहली बार आरएसएस का विरोधियों के साथ होगा विस्तृत संवाद।

इस कार्यक्रम के जरिए संघ यह कोशिश करेगा कि ज्यादा से जयादा लोग उसकी विचारधारा से जुड़ें। खुद सरसंघचालक मोहन भागवत देश के ज्वलंत मसलों पर संघ के नजरिए से लोग रूबरू कराएंगे।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : आरएसएस अपने 93 साल के इतिहास में पहली बार तीन दिवसीय अनोखा संवाद करेगा। इस दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत भविष्य के भारत को लेकर संघ का नजरिया पेश करेंगे। क्या 72 घंटे में बदलेगा RSS को लेकर विरोधियों का नजरिया! संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को डॉ। केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। ‘भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ विषय पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आज से आयोजित होने जा रहे तीन दिवसीय कार्यक्रम में आरएसएस के प्रति गलत धाराणाओं को तोड़ने की कोशिश होगी। संघ की स्थापना से अब तक 93 साल के इतिहास में पहली बार संघ प्रमुख मोहन भागवत ने करीब एक हजार प्रबुद्ध लोगों को संवाद करने के लिए बुलाया है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि 2019 के आम चुनाव से छह माह पहले हो रहे 72 घंटे के इस कार्यक्रम से क्या संघ के प्रति उसके विरोधियों का नजरिया कुछ बदलेगा? इस कार्यक्रम के जरिए संघ यह कोशिश करेगा कि ज्यादा से जयादा लोग उसकी विचारधारा से जुड़ें। खुद सरसंघचालक मोहन भागवत देश के ज्वलंत मसलों पर संघ के नजरिए से लोग रूबरू कराएंगे। इस कार्यक्रम में सभी राजनीतिक दलों को बुलाने का मतलब क्या है? क्या संघ यह दिखाने की कोशिश में है कि वो राजनीति से ऊपर है या फिर कोई और बात? क्या संघ के इस कार्यक्रम में कांग्रेस, सपा, बसपा, टीएमसी और लेफ्ट के नेता जाएंगे? दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेता संघ पर हमलावर हैं। राहुल ने इसी साल 24 अगस्त को यूरोप की धरती पर जाकर आरएसएस की तुलना अरब देशों में सक्रिय संगठन ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से कर दी थी। उसे नफरत और कट्टरता फैलाने वाला संगठन करार दिया था। राहुल गांधी की ही तरह कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि आरएसएस में अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे नजरिए को संघ संवाद से बदलना चाहता है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार के मुताबिक, ‘भारत आज विश्व में अपना विशेष स्थान प्राप्त करने के लिए अग्रसर है। ऐसा अनुभव किया गया है कि समाज का एक बड़ा प्रबुद्ध वर्ग राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न विषयों पर संघ का दृष्टिकोण जानने को उत्सुक है। इसी सिलसिले में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।’ संघ प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार कहते हैं, “आरएसएस वैचारिक छुआछूत में विश्वास नहीं करता। लेकिन ये दुर्भाग्य है कि अलग-अलग विचारधारा के लोगों में संवाद होना बंद हो गया है। संघ चाहता कि संवाद दोबारा शुरू हो। इसलिए इस कार्यक्रम में हमने सभी क्षेत्रों के बड़े लोगों को निमंत्रण दिया है। हमारी अपेक्षा है कि लोग संघ को संघ से समझें, थर्ड पार्टी की इंफार्मेशन से नहीं।”

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