प्रद्युम्न हत्याकांड मामले में मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी कंडक्टर अशोक जमानत मिल गई है। अदालत ने उसे 50000 का बॉन्ड पर रिहा कर दिया।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सीबीआई कंडक्टर अशोक के खिलाफ कोई भी सबूत जमा करने में नाकाम रही है।
अशोक को जमानत पर छोड़ते हुए अदालत ने कहा कि यह किसी के जीवन और मौत का सवाल है इसलिए 50,000 के मुचलके पर अशोक को रिहा किया जाता है। कंडक्टर अशोक की जमानत के बाद उसके वकील अनिल शर्मा का कहना है कि, ‘अशोक को जमानत संविधान के अनुच्छेद 21 के आधार पर दी गई है।
पुलिस और सीबीआई की जांच में कई असमानताएं पाई गईं। हमें संदेह का लाभ मिला।’ वहीं प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर का कहना है कि, ‘मुझे मीडिया से पता चला कि एक ऑडियो क्लिप भी सामने आया है जिसमें आरोपी छात्र और अशोक के बीच की बातचीत कैद है। सीबीआई मामले की जांच कर रही है और हमें परिणाम का इंतजार करना चाहिए।’
अशोक को बेल मिलने पर प्रद्युम्न के परिवार के वकील सुशील टेकरीवाल ने कहा, ‘प्रद्युम्न के पिता ये केस तब तक लड़ेंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। हमें कानून पर पूरा भरोसा है। हरियाणा पुलिस ने असली आरोपी को बचाने और पूरी जांच को प्रभावित करने की कोशिश की है।’ बेटे की रिहाई से खुश अशोक के पिता से जब जमानत पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो वो बोले, ‘अशोक को जमानत मिलने से हम सब बहुत खुश हैं।’