आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग करके सफर को सुरक्षित बनाएगा रेलवे

सिग्नल फेल होने की संभावनाओं को रोकने के लिए रेलवे आर्टिफिशल इंटेलीजेंस का प्रभावी उपयोग करेगा। सुरक्षित रेल संचालन के लिए सिग्नल का तंत्र महत्वपूर्ण है। रेलवे वास्तविक समय की जानकारी के साथ सिग्नल पर पूर्णतया निर्भर रहता है। वर्तमान में रेलवे एक मानवीय रखरखाव प्रणाली का इस्तेमाल करता है।

परियोजना के साथ जुड़े रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अब हम सिग्नल, ट्रैक सर्किट, एक्सल काउंटर और इंटरलाकिंग के सब-सिस्टम, रिले, टाइमर, वोल्टेज और करंट सहित बिजली आपूर्ति प्रणालियों की निरंतर ऑनलाइन निगरानी को हस्तक्षेप नहीं करने वाले सेंसर का उपयोग करके दूरस्थ स्थिति की निगरानी शुरू कर रहे हैं।’

यह तंत्र पूर्व निर्धारित अंतराल पर जानकारियां जुटाने का काम करता और उसे एक केंद्रीय स्थान पर भेजता है। परिणामस्वरूप सिग्नल के तंत्र में किसी भी प्रकार की खामी या समस्या का पता वास्तविक समय में लगाया जा सकेगा। साथ ही संभावित देरी व दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा। सिग्नल का फेल होना रेल दुर्घटनाओं और ट्रेन के विलंब से चलने के प्रमुख कारणों में एक है।

फिलहाल ब्रिटेन में सिग्नल की रिमोट मानिटरिंग होती है। इस प्रणाली में एक वायरलेस (3जी, 4जी और हाई स्पीड मोबाइल) के जरिये जानकारी भेजने की परिकल्पना की गई है। इनके आधार पर आर्टिफिशल इंटेलीजेंस की मदद से बड़ी जानकारियों के भविष्यसूचक और निर्देशात्मक विश्लेषण के लिए आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा।

अधिकारी ने कहा, ‘यह किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का पहले ही अनुमान लगा लेगा।’ रेलवे ने इसका परीक्षण पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम रेलवे के दो हिस्सों अहमदाबाद-वडोदरा तथा बेंगलुरु-मैसूर पर करने का फैसला किया है। इसके परिणामों के आधार पर प्रणाली को धीरे-धीरे अन्य खंडों तक बढ़ाया जाएगा।

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