हिमाचल प्रदेश: शिमला के बलग में अंधविश्वास की नौटंकी हुई बंद, भगवानों का अब होगा मनोवैज्ञानिक इलाज।
क्या धर्म या देवी-देवताओं के विपक्षियों से लोग इसी तरह निपटेंगे?
(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) शिमला: ठियोग के गांव बलग में चल रहा अवतारों और भगवानों का महातमाशा आखिरकार बंद हो गया है। इसे बंद करवाने में प्रशासन आगे आया है। दरासल कुछ स्थानीय लोग इन भगवानों से उलझ पड़े थे और इन अवतारियों के परिजनों के साथ तीखी बहस भी हुई। मामला ऐसा था कि पुलिस बस दोनों पक्षों का बीच-बचाव ही करती रही। स्थानीय लोग अपने देवी-देवताओं के अपमान पर इतने बिफ़र पड़े कि देवता शिरगुल के भक्तों की टोली ने हल्ला बोल दिया। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती, इससे पहले ही ज़रूरी एतिहात लेते हुए प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए, सभी बाहरी लोगों के वहां आने पर रोक लगा दी। पुलिस अब पूरी स्थिति पर नज़र बनाये हुए है।
क्या था पूरा मामला?
हिमाचल प्रदेश, शिमला के बलग में तीन बच्चों ने खुद को देवताओं का अवतार घोषित कर दिया था। यही नहीं वे भक्तों के कष्टों के हरण का दावा करते हुए, कई रोगों का भी इलाज करने लगे। सोशल मीडिया और लोगों के मुँह से सुन कर भीड़ अलग-अलग राज्यों से भी यहाँ आने लगी। हैरानी की बात तो ये भी थी कि ‘न्यूज़ लाइव नाऊ’ के पूछने पर कुछ स्थानीय लोग भी इनका समर्थन करते हुए आगे आ रहे थे। जब हमने लोगों से इस अन्धविश्वास के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने को कहा, तो उनका कहना था कि किस-किस को रोकोगे यहाँ, सारे हिमाचल में इस तरह का खेल तो देवी-देवताओं के नाम पर चलता ही रहता है। अगर ये लोग अंधविश्वासी हैं तो वो क्या हैं? शनिवार को एसडीएम ठियोग मोहनदत्त शर्मा पूरे प्रशासनिक अमले के साथ बलग मौके पर पहुंचे, जहाँ भीड़ में हंगामा हो रहा था और तब उनहोंने लोगों के वहां जाने पर रोक लगा दी।
सभी रास्तों को सील करने के लिए अब पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। केवल स्थानीय लोग ही अपने घरों की तरफ जा सकेंगे। एसडीएम ने इन तीन भाई-बहनों और उनके माता-पिता से भी बातचीत कर उनकी काउंसलिंग की भी कोशिश की। वहां स्थानीय लोगों के हंगामे से घबराये इन कथित अवतारी बच्चों ने प्रशासन से अपने लिए सुरक्षा मांगी है और लिख कर भी दिया कि उनके पास कोई नहीं आएगा और उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। हालांकि ये प्रश्न भी पैदा हो गया कि क्या लोकतंत्र में केवल एक पक्ष जिसे हम ठीक मानते हैं उसे ही अपनी बात रखने का हक़ है? क्या धर्म या देवी-देवताओं के विपक्षियों से लोग इसी तरह निपटेंगे? कहीं इन कथित अवतारियों के किसी अधिकार का दमन सुरक्षा या अन्धविश्वास के नाम पर तो नहीं हुआ? ख़ैर सवाल तो हर और से उठेंगे! लेकिन कम से कम इस तमाशे पर विराम लगता दिख रहा है।हमें बताया गया कि ये बच्चे अपना इलाज करवाने के लिए भी तैयार हैं और बच्चों के माता-पिता खुद बच्चों का इलाज करवाएंगे।