युद्ध के दौरान ट्रंप का बदला-बदला रवैया, व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए

(न्यूजलाइवनाउ-USA) अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने व्हाइट हाउस के अंदर की स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया। यह मामला उस समय का है जब ईरान में अमेरिकी एफ-15ई लड़ाकू विमान मार गिराया गया और उसमें सवार दोनों एयरमैन दुश्मन के इलाके में फंस गए। 

युद्ध के दौरान ट्रंप का बदला-बदला रवैया

इस घटना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली और उनके व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक तौर पर सख्त और आक्रामक नजर आने वाले ट्रंप, अंदरखाने इस घटना से काफी घबराए हुए थे।

ईरान के साथ संघर्ष के दौरान ट्रंप लगातार दो अलग-अलग रूपों में दिखाई दिए। एक तरफ वे कड़े बयान देकर ईरान को चेतावनी देते रहे, वहीं दूसरी ओर निजी बैठकों में उनकी चिंता और बेचैनी साफ झलक रही थी।

 बताया गया कि वे जानबूझकर खुद को अनिश्चित और खतरनाक दिखाने की रणनीति अपना रहे थे, ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके। इसी क्रम में उन्होंने सोशल मीडिया पर कई विवादित और भड़काऊ पोस्ट भी किए।

जब क्रैश हुआ फाइटर जेट

3 अप्रैल को ईरान ने अमेरिकी एफ-15ई विमान को मार गिराया। इसके बाद दोनों पायलट ईरानी क्षेत्र में फंस गए, जिससे अमेरिकी प्रशासन में हड़कंप मच गया।

 जैसे ही यह खबर ट्रंप तक पहुंची, वे बेहद परेशान हो गए और कई घंटों तक अपने अधिकारियों पर नाराजगी जताते रहे। उन्हें यह डर सताने लगा कि कहीं यह घटना 1979 के ईरान बंधक संकट जैसी स्थिति न बना दे, जिसने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया था। 

सिचुएशन रूम से दूर रखे गए ट्रंप

हालात इतने संवेदनशील थे कि बचाव अभियान के दौरान ट्रंप को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम से दूर रखा गया। अधिकारियों को लगा कि उनका आवेगपूर्ण व्यवहार ऑपरेशन को प्रभावित कर सकता है।

 इस दौरान उपराष्ट्रपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी लगातार ऑपरेशन की निगरानी करते रहे, जबकि ट्रंप को सिर्फ जरूरी अपडेट ही दिए जाते थे।

अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाया। एक पायलट को कुछ घंटों में सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि दूसरे को ढूंढने में करीब दो दिन लग गए।

 इस मिशन में सीआईए ने भी अहम भूमिका निभाई। एजेंसी ने भ्रामक जानकारी फैलाकर दुश्मन को भ्रमित किया और आखिरकार दूसरे पायलट का पता लगाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

 यह अभियान बेहद जटिल और जोखिम भरा था, जिसमें बड़ी संख्या में सैनिक और विमान शामिल थे।

जब दोनों पायलट सुरक्षित वापस आ गए, तो ट्रंप ने इस ऑपरेशन की सफलता का जोर-शोर से प्रचार किया। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने फिर से आक्रामक बयानबाजी शुरू कर दी और ईरान को कड़ी चेतावनी दी।  

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